नयी दिल्ली , अप्रैल 9 -- धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों के विरूद्ध कार्रवाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, वित्तीय खुफिया इकाई-भारत (एफआईयू-इंडिया) और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) ने सूचना साझाकरण और समन्वय को बढ़ाने के लिए एक व्यापक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए है।

वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को एक विज्ञप्ति में यह जानकारी देते हुए कहा कि यह समझौता देश में साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों के विरूद्ध लड़ाई में अग्रणी दो एजेंसियों के बीच सहयोगात्मक खुफिया जानकारी साझा करने के एक नए दौर की शुरुआत है। समझौता ज्ञापन पर एफआईयू-आईएनडी के निदेशक अमित मोहन गोविल और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश कुमार ने हस्ताक्षर किए।

यह सहयोग ऐसे समय में हुआ है जब भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम में अत्यधिक बदलाव आया है, जिसके चलते नागरिकों को साइबर अपराध और धोखाधड़ी से बचाने के लिए सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है। यह समझौता ज्ञापन दोनों एजेंसियों को प्रचालन संबंधी जानकारी विकसित करने और जांच एजेंसियों को वित्तीय अपराधों को रोकने, डिजिटल लेनदेन की सुरक्षा करने और परिसंपत्ति की वसूली करने में सहायता प्रदान करेगा।

वित्त मंत्रालय ने कहा है कि इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य दोनों एजेंसियों को राष्ट्रीय स्तर पर धोखाधड़ी का पता लगाने के प्रोटोकॉल को बेहतर बनाने के लिए सशक्त प्रतिक्रिया तंत्र स्थापित करने में सक्षम बनाना, साथ ही वित्तीय संस्थानों को साइबर धोखाधड़ी की रोकथाम के प्रयासों को सुदृढ़ करने के लिए दिशा-निर्देश और चेतावनी संकेतक विकसित करने एवं प्रसारित करने में सुविधा प्रदान करना है।

यह समझौता देश में साइबर अपराध के विरूद्ध लड़ाई में "समग्र सरकारी" दृष्टिकोण की अवधारणा अपनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

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