तिरुवनंतपुरम , दिसंबर 18 -- केरल के विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह के निर्माण का अगला चरण जनवरी 2026 में शुरू होने वाला है।

पिछले साल तीन दिसंबर को बंदरगाह के व्यावसायिक परिचालन शुरू होने के बाद से बंदरगाह ने अपने अनुमानित लक्ष्य से लगभग चार लाख अधिक कंटेनरों का प्रबंधन किया है। इस दौरान यहाँ 636 जहाज आए और लगभग 14 लाख कंटेनरों का संचालन किया गया, जो अनुमानित 10 लाख के लक्ष्य से काफी अधिक है।

केरल के बंदरगाह मंत्री वी. एन. वासवन ने बताया कि एमएससी टर्की, एमएससी इरीना और एमएससी वेरोना जैसे दुनिया के कुछ सबसे बड़े कंटेनर जहाज विझिंजम में आये और उन्होंने यहां लंगर डाला। ये जहाज इससे पहले एशियाई तट रेखा के किसी भी बंदरगाह पर नहीं रुके थे।

श्री वासवन ने कहा कि निर्माण के दूसरे, तीसरे और चौथे चरण को शुरू करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। दूसरे चरण में, वर्तमान 800 मीटर के बर्थ (जहाज लगाने की जगह) को 1,200 मीटर और बढ़ाया जाएगा, जिससे इसकी कुल लंबाई 2,000 मीटर हो जाएगी। इससे बड़े कंटेनर जहाजों को एक साथ खड़ा करना संभव हो सकेगा।

समुद्री लहरों को रोकने वाली दीवार को भी वर्तमान 2.96 किमी से 920 मीटर और बढ़ाकर 3.9 किमी से अधिक किया जाएगा। निर्माण के अगले चरण का उद्घाटन जनवरी के दूसरे सप्ताह में करने की योजना है, जिसकी अंतिम तिथि मुख्यमंत्री और अडानी समूह के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा के बाद घोषित की जाएगी।

संशोधित समझौते के अनुसार, बंदरगाह के दूसरे, तीसरे और चौथे चरण का काम 2028 तक पूरा हो जाएगा। पूरी तरह चालू होने के बाद, विझिंजम के एक प्रमुख वैश्विक माल ढुलाई केंद्र के रूप में उभरने की उम्मीद है।

मंत्री ने कहा कि बंदरगाह को जोड़ने वाली अस्थायी सड़क अप्रोच रोड जल्द ही पूरी हो जाएगी, जिससे सड़क मार्ग से माल ढुलाई में आसानी होगी। प्रस्तावित 10.7 किमी रेल संपर्क के लिए भूमि अधिग्रहण का काम भी प्रगति पर है।

बंदरगाह को 'एकीकृत चेक पोस्ट' (आईसीपी) का दर्जा मिलने के बाद, पर्यटन विभाग के समन्वय से पर्यटन संबंधी सुविधाओं को विकसित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। सरकार ने आवश्यक यार्ड सुविधाओं और अगामी चरणों के निरीक्षण के लिए बुनियादी ढांचे के विकास हेतु लगभग 50 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करने का भी निर्णय लिया है।

बंदरगाह ने अब तक राज्य के लिए लगभग 97 करोड़ रुपये का कर राजस्व उत्पन्न किया है। वर्तमान में लगभग 1,000 लोग सीधे तौर पर कार्यरत हैं। सभी चरण पूरे होने पर इस परियोजना से 6,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

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