चेन्नई , फरवरी 27 -- अभिनेता और तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के संस्थापक विजय की पत्नी संगीता ने चेंगलपट्टू परिवार न्यायालय में तलाक की याचिका दायर की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उनके पति का एक अभिनेत्री के साथ विवाहेतर संबंध है।

इस मामले में सुनवाई 20 अप्रैल को होगी। बताया गया है कि अदालत ने विजय को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। हालांकि यह याचिका तीन दिसंबर, 2025 को दायर की गई थी, लेकिन यह शुक्रवार को मीडिया में लीक हो कर सार्वजनिक हो गई।

श्रीमती संगीता ने याचिका में विजय के साथ अपने विवाह को समाप्त करने की मांग की है। इसके साथ ही याचिका के अंतिम निपटारे तक उनके वैवाहिक घर में रहने के निर्देश देने के लिए भी प्रार्थना की है। उन्होंने अभिनेता को उनकी आय और सामाजिक स्थिति के अनुरूप उचित और तर्कसंगत स्थायी गुजारा भत्ता देने का निर्देश देने की भी मांग की।

श्रीमती संगीता ने यह भी कहा कि सभी पक्षों की प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुए वह अभिनेत्री के नाम का खुलासा करने से बच रही हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह उक्त अभिनेत्री को याचिका में दूसरे प्रतिवादी के रूप में जोड़ने का अधिकार सुरक्षित रखती हैं।

बताया गया है कि यह दंपत्ति पिछले कुछ समय से अलग रह रहा है। श्री विजय और श्रीमती संगीता की शादी 25 अगस्त, 1999 को हुई थी और उनके दो बच्चे हैं-बेटा जेसन संजय (25) और बेटी दिव्या साशा (20 वर्षीय) है। विशेष विवाह अधिनियम, 1954 की विभिन्न धाराओं के तहत दायर याचिका में संगीता ने कहा कि हालांकि उनके विवाहित जीवन में कभी-कभी कुछ कठिनाइयाँ आईं, लेकिन दोनों ने उनको सुलझाया और साथ में अपना जीवन जारी रखा। लेकिन अब उन्होंने अभिनेता के साथ अपने विवाह को समाप्त करना ही उचित समझा है।

श्रीमती संगीता ने कहा कि अप्रैल 2021 में उन्हें पता चला था कि श्री विजय एक अभिनेत्री के साथ विवाहेत्तर संबंधों में शामिल थे, जिसने उनको गहरी मानसिक पीड़ा दी। हालांकि उन्होंने याचिका में कहा, "विजय ने शुरू में आश्वासन दिया था कि वह अभिनेत्री के साथ संबंध खत्म कर देंगे, लेकिन उन्होंने बिना किसी पछतावे के संबंध जारी रखा, जिससे मुझे लंबे समय तक मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।"उन्होंने कहा कि सितंबर 2021 और फरवरी 2022 के बीच इस मुद्दे को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने के प्रयास किए गए थे, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला और बच्चों की शिक्षा और भावनात्मक भलाई को देखते हुए मामले को टाल दिया गया था।

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