बेलगावी , फरवरी 12 -- कर्नाटक भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक विजयेंद्र येदियुरप्पा ने गुरुवार को कांग्रेस सरकार पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के बड़े हिस्से की उपेक्षा करते हुए अल्पसंख्यक तुष्टीकरण को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।

उन्होंने इस बहस को "चयनात्मक तुष्टीकरण बनाम सामाजिक न्याय" के रूप में पेश किया। उनकी आलोचना का मुख्य बिंदु सरकार का हालिया आदेश था जिसमें अल्पसंख्यक विकास निगम के लाभार्थियों के लिए एकमुश्त निपटान योजना के तहत 100 प्रतिशत ब्याज माफी दी गई और लाभार्थियों को केवल मूलधन राशि ही चुकानी होगी।

श्री विजयेंद्र ने पूछा, "अगर अल्पसंख्यकों को 100 प्रतिशत ब्याज माफी दी जाती है, तो अन्य समुदायों ने क्या अन्याय किया है?" उन्होंने बहस की राजनीतिक दिशा तय करते हुए आगे कहा, "क्या अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों में कोई गरीब नहीं है?"श्री विजयेंद्र ने इस मुद्दे को विशेषाधिकार के बजाय समानता के मुद्दे के रूप में प्रस्तुत करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार, जो अहिंदा के नारे के सहारे सत्ता में आई थी लेकिन उसने उन्हीं समुदायों को हाशिए पर धकेल दिया है जिनका प्रतिनिधित्व करने का वह दावा करती है। उन्होंने तर्क दिया कि पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग खुद को तेजी से अलग-थलग एवं विश्वासघात हुआ महसूस कर रहे हैं।

उन्होंने व्यवस्थागत उपेक्षा की बात करते हुए कहा कि पिछड़े वर्गों के 1.41 लाख छात्र छात्रावास में प्रवेश पाने में असमर्थ हैं। उन्होंने कहा कि वादे पूरे करने का दावा करने वाली सरकार गरीब छात्रों को बुनियादी छात्रावास सुविधाएं भी प्रदान नहीं कर सकती। उन्होंने आगे कहा कि मंत्रियों ने भी इस कमी को स्वीकार किया है।

रोजगार के मुद्दे पर श्री विजयेंद्र ने अपना रुख स्पष्ट किया। कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए उन्होंने रोजगार सृजन के मामले में उसके रिकॉर्ड पर सवाल उठाया और बताया कि 27 लाख सरकारी पद अभी भी खाली पड़े हैं और भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अगर बेरोजगार युवाओं के लिए वाकई चिंता होती तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

उन्होंने हुबली में प्रदर्शनकारी युवाओं पर कथित लाठीचार्ज की घटना की भी याद दिलायी और कहा कि सरकार ने शिकायतों का समाधान करने के बजाय बल का प्रयोग किया।

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