जयपुर , जनवरी 15 -- बहुप्रतीक्षित, विश्व प्रसिद्ध एवं विचारों और संवाद का सबसे बड़ा उत्सव जयपुर साहित्य उत्सव (जेएलएफ) के 19वें संस्करण का गुुरुवार को राजस्थान की राजधानी जयपुर में शुरु हुआ। इस पांच दिवसीय उत्सव का शुभारंभ मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी और डॉ प्रेम चंद बैरवा की मौजूदगी में पारंपरिक दीप प्रज्वलन से हुआ।

उत्सव में भारत और दुनिया भर के साहित्य, राजनीति, मीडिया और संस्कृति-जगत की जानी-मानी हस्तियों ने शिरकत करेगी। वेदांता द्वारा प्रस्तुत और टीमवर्क आर्ट्स द्वारा आयोजित यह उत्सव 19 जनवरी तक चलेगा और संवाद, बहस और विचारों के स्वतंत्र आदान-प्रदान की अपनी परंपरा जारी रखेगा। उत्सव के पारंपरिक उद्घाटन मॉर्निंग म्यूज़िक को इंफोसिस फाउंडेशन ने समर्थन दिया, सत्र में गायिकाओं ऐश्वर्या विद्या रघुनाथ और रित्विक राजा के नेतृत्व में इस पांच सदस्यीय कर्नाटिक शास्त्रीय संगीत समूह ने स्वर और संगीत का शानदार संयोजन प्रस्तुत किया।

उद्घाटन सत्र में बुकर पुरस्कार विजेता लेखिका बानू मुश्ताक़ का मुख्य भाषण शामिल था, इसके बाद लेखकों और उत्सव के सह-निर्देशकों नमिता गोखले और विलियम डेलरिम्पल तथा फ़ेस्टिवल निर्माता संजॉय के. रॉय के उद्घाटन भाषण हुए। रॉय ने उत्सव की यात्रा पर बात करते हुए उन्होंने डिग्गी पैलेस से लेकर वर्तमान में नौ शहरों में इसकी वैश्विक उपस्थिति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे समकालीन विषयों से इसके जुड़ाव को रेखांकित किया।

उत्सव सह-निर्देशक और लेखिका नमिता गोखले ने दर्शकों का स्वागत किया, पूरे भारत और दुनिया के लेखकों का आभार जताया, जो विभिन्न भाषाओं और साहित्यिक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इतिहासकार, लेखक और उत्सव सह-निर्देशक विलियम डेलरिम्पल ने अपने भाषण में पिछले 19 वर्षों में फ़ेस्टिवल की गति और विकास पर बात करते हुए कहा: "इस फ़ेस्टिवल ने जिस भव्य रूप में जड़ें जमाई हैं, उसका कारण है.कभी-कभी पांच लाख लोग किताबों के बारे में लेखकों को सुनने आते हैं।"उद्घाटन सत्र में अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक़ से मौतुषी मुखर्जी ने संवाद किया। सुश्री मुश्ताक़ ने साहित्य को जीवन से अलग न मानते हुए कहा कि उनके पुरस्कार, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार 2025 शामिल है, उनकी सामाजिक जिम्मेदारी को मजबूत करते हैं। उन्होंने युवा लेखकों को सलाह दी: "केवल लेखन की योजना मत बनाओ, लिखना शुरू करो। लिखो, लिखो और लिखो।"प्रसिद्ध कवि एवं गीतकार जावेद अख़्तर ने जावेद अख़्तर: पॉइंट्स ऑफ व्यू सत्र में वारिशा फ़रासत के साथ बात करते हुए स्वतंत्रता के बाद की संस्कृति, भारत में मध्यवर्ग और समाज में लेखकों और कवियों की भूमिका पर चर्चा की। युवा दर्शकों को उन्होंने कहा कि दुनिया में हमेशा लोग होंगे जो आपसे बेहतर हैं। उनके मार्गदर्शन में प्रेरणा लेने के लिए दूसरों से प्रतिस्पर्धा करने की बजाय अपने भीतर देखें।

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