चंडीगढ़ , मार्च 06 -- हरियाणा सेवा अधिकार आयोग ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि विकास कार्य पूरे किए बिना भूखंडों की ई-नीलामी करना एक गंभीर प्रशासनिक चूक है।
आयोग का कहना है कि किसी भी सेक्टर में प्लॉट की ई-नीलामी से पहले वहां बुनियादी विकास कार्य पूरे होना जरूरी है, ताकि आवंटियों को समय पर कब्जा और निर्माण की सुविधा मिल सके। मामला फरीदाबाद के सेक्टर-76/77 में ई-नीलामी के जरिए खरीदे गए एक प्लॉट से जुड़ा है। शिकायतकर्ता केशव शर्मा ने आयोग को बताया कि क्षेत्र में विकास कार्य अधूरे होने के बावजूद उन्हें कब्जे का प्रस्ताव भेज दिया गया।
सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि एचएसवीपी ने आवश्यक विकास कार्य पूरे किए बिना ही प्लॉट की ई-नीलामी कर दी, जो निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि आवंटन पत्र की शर्तों के अनुसार यदि आवेदन मिलने के 30 दिनों के भीतर कब्जा नहीं दिया जाता, तो आवंटी को ब्याज देना अनिवार्य है।
हालांकि कई मामलों में यह ब्याज नहीं दिया जा रहा था। आयोग के हस्तक्षेप के बाद एचएसवीपी ने ऐसे मामलों में ब्याज देना शुरू किया। सुनवाई के दौरान आयोग ने संबंधित एस्टेट ऑफिसर और ई-नीलामी प्रकोष्ठ की भूमिका की जांच करने की भी आवश्यकता जताई। आयोग ने कहा कि बिना विकास कार्यों की स्थिति स्पष्ट किए नीलामी की मंजूरी देना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
आयोग ने हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम, 2014 के तहत शिकायतकर्ता केशव शर्मा को 5,000 रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
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