लखनऊ , फरवरी 01 -- लखनऊ विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष व वरिष्ठ अर्थशास्त्री प्रो. मनोज अग्रवाल ने 13वें केंद्रीय बजट को "आधुनिक भारत के विकास का ठोस रोडमैप" बताते हुए कहा कि यह बजट वित्तीय अनुशासन, संरचनात्मक सुधार और दीर्घकालीन विकास तीनों के बीच संतुलन स्थापित करता है।

प्राे अग्रवाल ने केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये यूनीवार्ता से कहा कि 53.5 लाख करोड़ रुपये के इस विशाल बजट में राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखने, ऋणग्रस्तता घटाने और साथ-साथ निवेश को प्रोत्साहित करने की स्पष्ट रणनीति दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि बजट घाटा 4.3 प्रतिशत होने का जहां अनुमान है, तो वही ऋण ग्रस्तता के घटकर 50.56 प्रतिशत होने का अनुमान है।

उन्होंने कहा कि जीएसटी और आयकर दरों में पहले किए गए सुधारों के बावजूद 2026-27 में राजस्व प्राप्तियों में संभावित वृद्धि यह संकेत देती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब स्थिरता के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने इसे सरकार की विश्वसनीय वित्तीय प्रबंधन क्षमता का प्रमाण बताया।

प्रो. अग्रवाल ने रेखांकित किया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत नौवां बजट युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों तीनों वर्गों की आकांक्षाओं को ध्यान में रखता है। औद्योगिक प्रगति, एमएसएमई सशक्तिकरण, पर्यटन अवसंरचना, कृषि, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी सेक्टर को दिया गया प्रोत्साहन रोजगार सृजन और उत्पादन विस्तार में सहायक सिद्ध होगा।

उनके अनुसार इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, बायोफार्मा उद्योग, टेक्सटाइल, खेल उपकरण निर्माण और 200 नए औद्योगिक क्लस्टरों की योजना "मेक इन इंडिया" को नई गति देगी। एमएसएमई के लिए 10,000 करोड़ रुपये के ग्रोथ फंड, मझोले शहरों में कॉरपोरेट मित्र मॉडल और पूंजी उपलब्धता बढ़ाने के उपाय जमीनी स्तर पर उद्यमिता को मजबूत करेंगे।

उन्होंने आईटी और डिजिटल अवसंरचना पर दिए गए जोर की सराहना करते हुए कहा कि इस बजट के माध्यम से आई के क्षेत्र में बड़ी पहल की गई है। जो विदेशी कंपनी भारत में डाटा सेंटर स्थापित करके क्लाउड का काम करेगी, उनको 2047 तक कर से मुक्त रखा जाएगा। ऐसे में डेटा सेंटर और क्लाउड सेवाओं पर दीर्घकालीन कर राहत देना, भारत को वैश्विक डिजिटल हब बनाने की दिशा में निर्णायक कदम है। साथ ही, पर्यटन और शहरी विकास पर निवेश से सेवा क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलेगी।

प्रो. अग्रवाल के अनुसार नरेंद्र मोदी सरकार का यह बजट समावेशी और पोषणीय विकास की मजबूत नींव रखता है। "ईज ऑफ डूइंग बिजनेस", ऊर्जा सुरक्षा, सामाजिक कल्याण और दीर्घकालीन निवेश पर केंद्रित यह बजट आने वाले वर्षों में अर्थव्यवस्था को अधिक सशक्त, प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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