नयी दिल्ली , फरवरी 01 -- उद्योग जगत ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट को विकासोन्मुख, संतुलित और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है।

उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने रविवार को जारी बयान में कहा कि बजट आर्थिक वृद्धि को तेज और स्थायी बनाने, लोगों की आकांक्षाओं को सशक्त साझेदारी में बदलने और विकास के अवसरों तक समावेशी पहुंच बनाने के 'तीन कर्तव्यों' को पूरा करती है। उन्होंने बताया कि 12.2 लाख करोड़ रुपए का पूंजीगत व्यय बुनियादी ढांचे को मजबूती देगा और आपूर्ति चेन की बाधाओं को दूर करेगा।

पीएचडीसीसीआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एवं महासचिव डॉ. रंजीत मेहता ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा को सेमीकंडक्टर निर्माण से जोड़ते हुए लिथियम-आयन सेल्स और सोलर ग्लास निर्माण के लिए पूंजीगत वस्तुओं पर सीमा शुल्क छूट तथा परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए छूट को 2035 तक बढ़ाना अहम कदम है।

रक्षा क्षेत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए पीएचडीसीसीआई रक्षा एवं एचएलएस समिति के चेयर अशोक अतलुरी ने कहा कि 7.85 लाख करोड़ रुपये का रक्षा आवंटन और 75 प्रतिशत घरेलू खरीद अनिवार्यता रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में निर्णायक संकेत है।

स्वास्थ्य क्षेत्र पर पीएचडीसीसीआई मेडिकल डिवाइसेज़ समिति के सह-अध्यक्ष गौरव अग्रवाल ने कहा कि बजट स्वास्थ्य शिक्षा, बुनियादी ढांचे, कैंसर व एनसीडी देखभाल, आयुष और मेडिकल टूरिज़्म को एक समेकित रणनीति में जोड़ता है, जिससे घरेलू विनिर्माण और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बल मिलेगा।

भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने कहा, "यह बजट संतुलित और भरोसेमंद है, जिसमें विकास, सबको साथ लेकर चलने और युवा शक्ति पर साफ फोकस है। फिक्की वित्त मंत्री की तारीफ करता है कि उन्होंने लगातार सुधारों, सार्वजनिक पूंजी खर्च में बढ़ोतरी, व्यापार करने में आसानी और विनिर्माण, एमएसएमई, कृषि और सेवा पर खास जोर देकर निरंतरता और स्थिरता बनाए रखी है।"भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष राजीव मेमानी ने केंद्रीय बजट पर टिप्पणी करते हुए कहा, कि यह वित्तीय अनुशासन, नीतिगत सुधारों और निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए लक्षित दखल के संतुलित मिश्रण के ज़रिए भारत की प्रतिस्पर्धा को मज़बूत करने के लिए एक मज़बूत और भरोसेमंद रास्ता पेश करता है। यह बजट ऐसे समय में भारत की विकास गाथा में विश्वास को मज़बूत करता है, जब वैश्विक आर्थिक हालात अनिश्चित बने हुए हैं और निवेश के फैसले तेज़ी से नीति की स्पष्टता और लंबे समय की भविष्यवाणी पर आधारित होते जा रहे हैं।

दूसरी ओर, भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (एसोचैम) के अध्यक्ष निर्मल मिंडा ने कहा, "केंद्रीय बजट 2026-27 ने बायोफार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, सेमीकंडक्टर, केमिकल्स, रक्षा और अवसंचरना उपकरण जैसे क्षेत्रों के लिए खास योजनाओं के ज़रिए घरेलू विनिर्माण को मज़बूत बढ़ावा दिया है। इंडियन सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, पुराने क्लस्टर्स को फिर से शुरू करना, ड्यूटी को सही करना, भरोसेमंद आयातक फ्रेमवर्क और निर्यात को आसान बनाने जैसे कदमों से वैल्यू चेन मज़बूत होंगी, रसद की दिक्कतें कम होंगी और भारत तेज़ी से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्दी, उच्च-मूल्य वाले विनिर्माण की ओर बढ़ेगा।"वेस्टिज मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर गौतम बाली ने कहा कि यह बजट लोगों के नेतृत्व वाली उद्यमिता को भारत की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का आधार मानता है। युवाशक्ति, स्किलिंग और ट्रस्ट-बेस्ड गवर्नेंस पर ज़ोर आत्मरोज़गार और दीर्घकालिक आय सृजन को बढ़ावा देगा।

शहरी विकास पर प्रतिक्रिया देते हुए कोसमोस पम्पस के सीईओ एवं को-फाउंडर अंकित जैन ने कहा कि भारत के शहरी विकास के लिए प्रस्तावित 20,000 करोड़ रुपये का खर्च एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम है। टियर-2, टियर-3 शहरों और मंदिर वाले शहरों पर फोकस से ये शहर इनोवेशन, रोज़गार और उत्पादकता के केंद्र बनेंगे।

एमएसएमई सेक्टर पर बजट के प्रभाव को रेखांकित करते हुए एएमए हर्बल ग्रुप ऑफ कंपनीज़ के को-फाउंडर एवं सीईओ यावर अली शाह ने कहा कि 10,000 करोड़ रुपये का एसएमई ग्रोथ फंड और 200 पुराने औद्योगिक क्लस्टर्स को पुनर्जीवित करने का निर्णय छोटे उद्योगों के लिए बड़ा सहारा बनेगा।

फुटकर (रिटेल) और खपत (कंजम्पशन) आधारित अर्थव्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए भूटानी इंफ्रा के सीईओ आशीष भूटानी ने कहा यह बजट भारत की रिटेल अर्थव्यवस्था में उपभोग आधारित विकास चक्र की मज़बूत नींव रखता है। एमएसएमई समर्थन, लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी में निवेश से टियर-2 और टियर-3 शहरों में संगठित और डिजिटल रिटेल का तेज़ी से विस्तार होगा।

रियल एस्टेट सेक्टर पर शालीमार कॉर्प के होल-टाइम डायरेक्टर खालिद मसूद ने कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड और पब्लिक सेक्टर एसेट्स को रियल एस्टेट इवेंस्टमेंट फंड में शामिल करने से फाइनेंसिंग तक पहुंच आसान होगी और प्रोजेक्ट जोखिम कम होंगे। टियर-2 और टियर-3 शहरों पर ज़ोर से रियल एस्टेट विकास को दीर्घकालिक अवसर मिलेंगे।

उद्यमियों की दृष्टि से यूक्लीन के संस्थापक एवं सीईओ अरुणाभ सिन्हा ने कहा कि एमएसएमई ग्रोथ फंड, ट्रेड रिसीवेबल्स इलेक्ट्रॉनिक डिस्काउंटिंग सिस्टम (ट्रेडस) और 'कॉरपोरेट मित्र' जैसी पहलें छोटे व्यवसायों के लिए व्यावहारिक समाधान प्रदान करेंगी और नकदी प्रवाह से जुड़ी चुनौतियों को कम करेंगी।

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