तिरुवनंतपुरम , जनवरी 26 -- केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने सोमवार को कहा कि विकसित भारत की यात्रा विकसित केरल से होकर गुजरनी चाहिए, जो राष्ट्रीय प्रगति में राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।
श्री अर्लेकर ने यहां सेंट्रल स्टेडियम में 77वें गणतंत्र दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत एक धार्मिक राष्ट्र नहीं है, बल्कि एक ऐसा समावेशी गणतंत्र है जो विविधता और लोकतांत्रिक मूल्यों को अपनाता है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भारत को "लोकतंत्र की जननी" के रूप में पहचानती है।
राज्यपाल ने इस साल पद्म पुरस्कारों में केरल की मज़बूत मौजूदगी पर खास खुशी ज़ाहिर करते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंदन को राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में उनके बेमिसाल योगदान के लिए दिया गया पद्म विभूषण राज्य के लिए गर्व की बात है। उन्होंने न्यायमूर्ति के.टी. थॉमस और पी. नारायणन को मिले पद्म विभूषण सम्मान का भी स्वागत किया और इन्हें केरल के लिए बड़े राष्ट्रीय सम्मान बताया।
उन्होंने अभिनेता ममूटी और वेल्लापल्ली नटेसन को पद्म भूषण मिलने पर बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान केरल की समृद्ध सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत को दिखाता है। उन्होंने कलामंडलम विमला मेनन और कोल्लाक्कल देवकी अम्मा की भी तारीफ की, जिन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया था, और उनके कामों को केरल की प्रतिभा और सामाजिक प्रतिबद्धता का सबूत बताया।
देश में वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ मनाए जाने की स्मृति दिलाते हुए, राज्यपाल अर्लेकर ने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस गीत ने स्वतंत्रता सेनानियों को इतनी प्रेरणा दी कि वे फाँसी के फंदे का भी मुस्कान के साथ सामना करने का साहस जुटा सके। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य से लेकर श्री नारायण गुरु और स्वामी चिन्मयानंद तक के महापुरुषों के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक योगदान ने न केवल केरल बल्कि पूरे देश को आलोकित किया है। राज्यपाल ने कहा कि मलयाली समाज ने कला, खेल, विज्ञान और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि केंद्र और राज्य एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार हैं, जिन्हें राष्ट्रीय विकास के लिए मिलकर काम करना चाहिए। मतभेद हो सकते हैं, लेकिन सभी को प्रगति के साझा दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना होगा।
राज्यपाल ने सभी राज्यों से 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध होने का आह्वान किया और केरल की प्रगति के माध्यम से भारत के विकास की अवधारणा को साकार करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के क्षेत्र में केरल की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि यह राज्य आज भी देश के लिए एक आदर्श बना हुआ है। राष्ट्रीय मतदाता दिवस का उल्लेख करते हुए उन्होंने सभी केरलवासियों से अपने मतदान अधिकार का प्रयोग करने और लोकतांत्रिक भागीदारी में नया मानदंड स्थापित करने की अपील की।
राज्य की राजधानी में 77वां गणतंत्र दिवस भव्य रूप से मनाया गया। सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित परेड में राज्यपाल ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और सलामी ली। कार्यक्रम सुबह 8.45 बजे शुरू हुआ। राज्यपाल के आगमन पर मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, मुख्य सचिव ए. जयथिलक और ज़िला कलेक्टर अनुकुमारी ने उनका स्वागत किया।
भारतीय वायुसेना (शंघुमुखम एयर फ़ोर्स स्टेशन) के विंग कमांडर विकास वशिष्ठ परेड कमांडर थे, जबकि मद्रास रेजिमेंट की दूसरी बटालियन के कैप्टन अभिषेक दुबे सेकंड-इन-कमांड थे। परेड में 11 सशस्त्र टुकड़ियाँ शामिल थीं, जिनमें भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना, आंध्र प्रदेश राज्य पुलिस, मालाबार स्पेशल पुलिस, इंडिया रिज़र्व बटालियन, केरल सशस्त्र महिला पुलिस बटालियन, रैपिड रिस्पॉन्स एंड रेस्क्यू फ़ोर्स, तिरुवनंतपुरम सिटी पुलिस, कारागार, आबकारी और वन विभाग शामिल थे। इसके अलावा 11 निःशस्त्र टुकड़ियाँ भी शामिल हुईं, जिनमें अग्निशमन एवं बचाव सेवाएँ, सैनिक स्कूल, एनसीसी, एनएसएस, स्टूडेंट पुलिस कैडेट और भारत स्काउट्स एंड गाइड्स शामिल थे।
तिरुवनंतपुरम सिटी पुलिस की एक घुड़सवार टुकड़ी ने भी परेड में भाग लिया। भारतीय सेना, तिरुवनंतपुरम सिटी पुलिस और सशस्त्र पुलिस बटालियन के बैंड ने संगीत के माध्यम से कार्यक्रम को सजीव बनाया।
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