जयपुर , अप्रैल 07 -- केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि के लिए तीन मुख्य लक्ष्य देश की खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय वृद्धि और पोषण सुरक्षा बताते हुए मंगलवार को कहा कि राज्यों को कृषि में आगे बढ़ने का रोडमैप तय किया जाएगा।
श्री चौहान आज यहां पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने केंद्र-राज्य साझेदारी, किसानों की आय वृद्धि, फूड एवं न्यूट्रीशन सिक्योरिटी, फार्मर आईडी आधारित डिजिटल कृषि और लचीली योजनाओं के क्रियान्वयन पर रोडमैप रखा। उन्होंने कहा कि एक दिन की औपचारिक रबी-खरीफ मीटिंग की जगह अब अलग-अलग एग्रो-क्लाइमेटिक ज़ोन के लिए गंभीर, विषय-आधारित क्षेत्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि पूरे पश्चिमी क्षेत्र की कृषि पर संपूर्णता से मंथन का प्रयास है, जिसमें पूरे दिन प्रजेंटेशन, वीडियो और विषयवार चर्चा के बाद ठोस निष्कर्ष और 'टू-डू लिस्ट' के साथ राज्यों को आगे बढ़ने का रोडमैप तय किया जाएगा।
श्री चौहान ने कहा कि गेेहू और चावल में भारत के भंडार इतने हैं कि रखने की जगह तक की चुनौती है, लेकिन दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता अभी हासिल करनी है ताकि खाद्य सुरक्षा पूरी तरह देश की अपनी उत्पादन क्षमता पर आधारित हो सके और आयात पर निर्भरता खत्म हो। उन्होंने दोहराया कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ और किसान उसकी आत्मा हैं, इसलिए किसानों की आय बढ़ाना, जीवन स्तर सुधारना और खेती को आसान बनाना सरकार की प्राथमिकता है, साथ ही जनता को पोषक आहार उपलब्ध कराने के लिए पोषण सुरक्षा को नीति का अनिवार्य अंग बताया।
उन्होंने फार्मर आईडी को आने वाले समय की सबसे उपयोगी व्यवस्था बताते हुए कहा कि एक प्रमाणित डिजिटल प्रोफ़ाइल के आधार पर बैंक लोन से लेकर सरकारी मदद तक सब कुछ तेज़ और पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि कुछ राज्यों में फार्मर आईडी के माध्यम से कुछ ही दिनों में हजारों करोड़ रुपये सीधे किसानों के खाते में ट्रांसफर किए गए हैं और आगे खाद वितरण जैसी संवेदनशील व्यवस्था भी किसान की भूमि और बोई गई फसल के आधार पर फार्मर आईडी से ही लिंक की जाएगी, ताकि सस्ता खाद डायवर्जन रोका जा सके।
उन्होंने पश्चिम एशिया एवं मिडिल ईस्ट की परिस्थितियों के संदर्भ में वैश्विक अनिश्चितताओं का ज़िक्र करते हुए कहा कि ऐसे संकट के दौर में डिजिटल और डेटा आधारित कृषि प्रशासन के माध्यम से ही देश और किसानों को सुरक्षित रखा जा सकता है, इसलिए सभी राज्यों को फार्मर आईडी के काम को मिशन मोड में 100 प्रतिशत पूरा करने का आग्रह किया गया।
उन्होंने बताया कि दलहन और तिलहन की खरीद पीएम-आशा के माध्यम से कृषि विभाग द्वारा और गेंहू-चावल की खरीद खाद्य विभाग द्वारा की जा रही है तथा राज्यों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों के अनुरूप ही खरीद की स्वीकृति दी गई है, लेकिन समयबद्ध खरीद सुनिश्चित करना राज्यों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि चने, मसूर और तुअर की 100 प्रतिशत खरीद की जाएगी और जहां फिजिकल खरीद संभव नहीं है, वहां मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के मॉडल पर सरसों और सोयाबीन में भावांतर भुगतान के माध्यम से एमएसपी और बाजार भाव के अंतर की भरपाई किसानों के खातों में सीधे की जा सकती है।
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