सतीश सिंह सेलखनऊ , दिसम्बर 29 -- महाकुंभ 2025 के साथ शुरू हुआ साल उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के लिए उपलब्धियों, सुधारों और सख्त अनुशासन के साथ-साथ कई गंभीर चुनौतियों को उजागर करने वाला साल रहा। बुनियादी ढांचे के विस्तार से लेकर आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में सुधार तक, प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को आमजन के और करीब लाने का प्रयास किया। हालांकि, डॉक्टरों की कमी, कुछ अधूरी घोषणायें और कमजोरियां यह भी बताती हैं कि सुधार की प्रक्रिया अभी अधूरी है।
उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के नेतृत्व में वर्ष 2025 में स्वास्थ्य विभाग ने अनुशासन और जवाबदेही को अपनी प्राथमिक नीति बनाया। बिना सूचना गैरहाजिर रहने, लापरवाही, भ्रष्टाचार और अवैध प्राइवेट प्रैक्टिस के मामलों में सख्त कार्रवाई की गई। वर्ष भर में 50 से अधिक डॉक्टरों को निलंबित या बर्खास्त किया गया। विभाग का कहना है कि इस सख्ती का उद्देश्य कर्मचारियों में भय पैदा करना नहीं, बल्कि मरीजों के हितों की रक्षा करना है।
साल 2025 में प्रदेश सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। इसके तहत ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का विस्तार किया गया। वर्ष के अंत तक प्रदेश में 22,775 आयुष्मान आरोग्य मंदिर क्रियाशील हो गए, जहां 58 प्रकार की आवश्यक दवाएं और 13 तरह की जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन केंद्रों पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) के साथ एएनएम की तैनाती से महिलाओं और बच्चों को प्राथमिक स्तर पर ही जांच और उपचार मिलने लगा है। इससे छोटे रोगों के लिए जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों पर बढ़ता दबाव कुछ हद तक कम हुआ।
वर्ष 2025 की सबसे बड़ी उपलब्धियों में हार्ट अटैक (स्टेमी) केयर नेटवर्क और ब्रेन स्ट्रोक के इलाज के लिए हब एंड स्पोक मॉडल की शुरुआत रही। इस मॉडल के तहत प्रदेश के बड़े चिकित्सा संस्थानों केजीएमयू, एसजीपीजीआई और लोहिया संस्थान को हब बनाया गया, जबकि जिला अस्पतालों और सीएचसी को स्पोक के रूप में उनसे जोड़ा गया। इस व्यवस्था के तहत गोल्डन ऑवर में मरीज को प्राथमिक इलाज, सीटी स्कैन, थक्का गलाने वाली दवा (थ्रोम्बोलाइटिक थेरेपी) और त्वरित रेफरल की सुविधा मिली। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस नेटवर्क से अब तक 150 से अधिक मरीजों की जान बचाई जा चुकी है।
सरकार ने दावा किया कि 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं का रिस्पॉन्स टाइम देश में सर्वश्रेष्ठ हुआ है और 2,500 से अधिक नई एंबुलेंस को बेड़े में शामिल किया गया। इससे दूरदराज़ क्षेत्रों में इमरजेंसी सेवाओं की पहुंच बढ़ी। हालांकि, वर्ष 2025 में इन सेवाओं की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल भी उठे। कई जिलों से समय पर एंबुलेंस न पहुंचने, स्टाफ की कमी और मेंटेनेंस से जुड़ी शिकायतें सामने आईं। इससे स्पष्ट हुआ कि संख्या बढ़ाने के साथ-साथ गुणवत्ता और निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है।
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश वर्ष 2025 में देश में अग्रणी राज्य बनकर उभरा। प्रदेश में 5.21 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए गए और 57 लाख से अधिक मरीजों को मुफ्त इलाज का लाभ मिला। इस वर्ष यूपी पहला राज्य बना, जहां आयुष्मान लाभार्थियों को निजी अस्पतालों में रियायती दरों पर ओपीडी परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई गई। वहीं, फर्जीवाड़े के मामलों में सख्त कार्रवाई कर करोड़ों रुपये की रिकवरी ने यह संदेश दिया कि वित्तीय अनुशासन से कोई समझौता नहीं होगा।
इतने बड़े पैमाने पर ढांचे के विस्तार के बावजूद डॉक्टरों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी वर्ष 2025 की सबसे बड़ी चुनौती बनी रही। स्वीकृत पदों की तुलना में हजारों पद खाली हैं, खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में। समस्या के समाधान के लिए सरकार ने सेवानिवृत्ति आयु 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष की, एनएचएम के तहत विशेषज्ञों की नियुक्ति की और सरकारी अस्पतालों में डीएनबी पाठ्यक्रम शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। विशेषज्ञों का मानना है कि ये कदम मध्यम और दीर्घकाल में सकारात्मक परिणाम देंगे, लेकिन फिलहाल जमीनी स्तर पर कमी साफ दिखाई देती है।
लखनऊ के लोकबंधु अस्पताल में लगी भीषण आग वर्ष 2025 की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक रही, जिसमें करीब 200 मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस घटना ने अस्पतालों की फायर सेफ्टी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। इसके बाद सरकार ने सभी सरकारी अस्पतालों में फायर मॉक ड्रिल, अलार्म सिस्टम और सुरक्षित निकासी व्यवस्था को अनिवार्य किया। यह घटना इस बात का संकेत बनी कि स्वास्थ्य सेवाओं में इलाज के साथ सुरक्षा व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
स्वास्थ्य मंत्री ने वर्ष 2025 में जिला अस्पतालों में एमआरआई सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की थी, लेकिन वर्ष के अंत तक यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। आज भी जिला अस्पतालों में एमआरआई जांच उपलब्ध नहीं है, जिससे मरीजों को निजी और महंगे विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ता है। यह मुद्दा 2026 की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर माना जा रहा है।
वर्ष 2025 चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक रहा। प्रदेश में 81 मेडिकल कॉलेज संचालित हुए, एमबीबीएस और पीजी सीटों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई। रोबोटिक सर्जरी, गामा नाइफ, बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं की शुरुआत ने चिकित्सा शिक्षा और इलाज-दोनों को नई दिशा दी। हालांकि शिक्षकों की कमी के कारण कुछ कॉलेजों को मानक पूरे करने में कठिनाई भी झेलनी पड़ी।
वहीं नीट यूजी 2025 के अंतर्गत उत्तरप्रदेश में एमबीबीएस के दाखिले के दौरान 10 जिलों में 64 स्टूडेंट्स के द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का जाली सर्टिफिकेट लगाकर एडमिशन लेने का मामला भी सामने आया। जिसमे इनके एडमिशन भी निरस्त किये गए। इस घटना से प्रवेश को और फुलप्रूफ बनाने का संकेत दिया, जिससे फर्जी लोगो को इससे दूर रखा जाए।
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