अमृतसर , अप्रैल 16 -- पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में बेअदबी (धार्मिक ग्रंथों के अपमान) के खिलाफ सख्त कानून पारित किए जाने के बाद पंजाब की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रो लक्ष्मीकांता चावला ने इस कानून की व्यावहारिकता, तैयारी और निष्पक्षता को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं।
प्रो चावला ने गुरुवार को कहा कि 13 अप्रैल को बुलाए गए विशेष सत्र में सरकार ने दावा किया कि बेअदबी के मामलों में दोषियों को आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। प्रो. चावला ने इस प्रावधान को अव्यावहारिक बताते हुए इसकी आलोचना की।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को जीवनभर के लिए जेल में डाल दिया जाता है तो उससे 25 लाख रुपये का जुर्माना वसूलना कैसे संभव होगा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अधिकतर मामलों में आरोपी गरीब या मानसिक रूप से अस्थिर बताए जाते हैं, ऐसे में इतनी बड़ी राशि का जुर्माना किस आधार पर तय किया गया है।
प्रो. चावला ने कानून के क्रियान्वयन और जांच प्रक्रिया पर भी चिंता जताई। उन्होंने पूछा कि क्या राज्य में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो पाएगी और पूर्व में जिन मामलों में बेअदबी के आरोपियों की हत्या कर दी गई, उनमें दोषियों को क्या सजा मिली। उन्होंने यह भी कहा कि देश में विभिन्न धर्मों के अनेक पवित्र ग्रंथ हैं, ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि यह कानून किन-किन ग्रंथों पर लागू होगा।
प्रो. चावला ने आरोप लगाया कि आगामी चुनावों को देखते हुए सरकार इस तरह के कानून ला रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे गंभीर विषय पर व्यापक चर्चा और ठोस तैयारी की आवश्यकता थी।
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