भोपाल , जनवरी 30 -- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वन्य जीव और मनुष्य के बीच सह-अस्तित्व की भावना विकसित करने में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका अत्यंत सराहनीय है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों की पुनर्स्थापना, चंबल में घड़ियाल और नर्मदा में मगरमच्छों को स्वछंद विचरण के लिए छोड़ना वन विभाग की दक्षता और समर्पण का परिणाम है। वन विभाग की गतिविधियों का विस्तार जल, थल और नभ सभी ओर है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी में वानिकी सम्मेलन एवं आईएफएस मीट-2026 के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार असम सहित अन्य राज्यों से भी वन्य जीवों को लाने के प्रयास कर रही है। वन्य जीव संरक्षण में प्रदेश की जल संरचनाओं की भी बड़ी भूमिका है। आईएफएस मीट न केवल पेशेवर संवाद का मंच है, बल्कि पारिवारिक आत्मीयता और सहयोगी संबंधों को मजबूत करने का भी अवसर प्रदान करता है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन विभाग का आईएफएस थीम सॉन्ग एवं उसके वीडियो का लोकार्पण किया। साथ ही प्रदेश के वनों की सुरक्षा और बेहतरी में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी एवं पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. पी.बी. गंगोपाध्याय को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड-2026 प्रदान किया गया। यह पुरस्कार उनकी धर्मपत्नी श्रीमती गौरी गंगोपाध्याय ने प्राप्त किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में आईएएस, आईपीएस के बाद अब आईएफएस मीट का आयोजन सराहनीय पहल है। ऐसे आयोजनों से वर्तमान अधिकारी अपने वरिष्ठों के अनुभवों से सीखते हैं। भारतीय संस्कृति में वनों का विशेष महत्व रहा है, जिसका उल्लेख सनातन परंपरा के वानप्रस्थ आश्रम में भी मिलता है।
उन्होंने कहा कि वन अधिकारी और कर्मचारी जंगलों के आसपास रहने वाले ग्रामीण परिवारों के लिए सहयोगी और मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं। वनग्रामों में बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था और वन्य जीव संरक्षण के लिए कोर एरिया और बफर जोन के बीच तार फेंसिंग की शुरुआत भी एक सराहनीय कदम है। इससे वन्य जीवों और रहवासियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। राज्य सरकार वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के कल्याण के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री वी.एन. अंबाडे ने बताया कि अविरल नर्मदा योजना के तहत नर्मदा बेसिन में 5000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में नदी पुनर्भरण और पौधरोपण के कार्य किए जा रहे हैं। विभाग द्वारा प्रतिवर्ष 5 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण किया जाता है। रातापानी अभयारण्य को डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के नाम पर टाइगर रिजर्व घोषित किया गया है। वन विभाग के फॉरेस्ट गार्ड श्री जगदीश अहिरवार के प्रयासों की प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में सराहना की है।
कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री श्री दिलीप सिंह अहिरवार, अपर मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल सहित भारतीय वन सेवा के अधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ आईएफएस अधिकारियों का समूह चित्र भी लिया गया।
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