, Dec. 8 -- तृणमूल कांग्रेस की काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि देश के विभाजन की सोच रखने वाले लोगों का बहिष्कार होना चाहिए। उनका कहना था कि यह गीत तब लिखा गया जब अंग्रेजों का जुल्म बढ रहा था और यह प्रतिवाद में लिखा गया गीत था। बंगाल के लोग प्रतिवाद करना जानते हैं और उसी का परिणाम है कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का लिखा वंदे मातरम अंग्रेजों के खिलाफ एक सशक्त माध्यम बना।

उन्होंने कहा कि तब लोग सिर्फ लड़ना जानते थे और चुपचाप देश की आजादी के लिए लड़ते रहते थे। वह समय अलग था और फोटो सूट का जमाना नहीं था। क्रांतिकारी सिर्फ लड़ना जानते थे और देश की आजादी की लड़ाई लड़ते रहते थे।

द्रविड मुन्नेत्र कषगम-डीएमके के ए राजा ने कहा कि राष्ट्रगीत देश के लिए विशेष है और यह गीत बताता है कि भाषा और भौगोलिक विविधता वाले देश का स्वर एक है।

उन्होंने राष्ट्र गान को तो ठीक बताया लेकिन राष्ट्रीय गीत की जरूरत पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि सच यही है कि वंदे मातरम् राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान देश की भावनाओं से गहराई से जुड़ा रहा है और पूरे देश को इस गीत ने एक सूत्र में अंग्रेजों के खिलाफ बांध दिया था। बंकिम चंद्र के इस गीत ने देशभक्ति को धर्म और धर्म को देशभक्ति में भी बदल दिया था। उनका कहना था कि वंदे मातरम को लेकर जवाहरलाल नेहरू ने सुभाष चंद्र बोस को एक पत्र भी लिखा था।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा और कहा कि यह सही है कि आजादी के आंदोलन के दौरान आनंदमठ में सम्मिलित वंदे मातरम् गीत से आजादी के दीवानों को ऊर्जा मिलती रही है लेकिन सवाल है कि वंदे मातरम् का मूल सपना क्या था और इस गीत को तोड़ा किसने है। उन्होंने यह भी पूछा कि वंदे मातरम् का मूल सपना क्या था और इसमें विभाजन किसने पैदा किया। उन्होंने भाजपा की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ये सब आपके ही पूर्वज थे जिन्होंने विभाजन पैदा किया था।

तेलुगु देशम पार्टी की डॉ बायरेड्डी शबरी ने कहा है कि यह देश के लिए प्रेरणाप्रद गीत रहा है और सभी जाति तथा धर्म के लोगों ने इसको गाया है। पूरे देश में यह गीत गाया गया और लाखों लोगों को देशक्ति के लिए इस गीत ने प्रेरित किया। उन्होंने डॉ राजेन्द्र प्रसाद के शब्दों को उद्धृत किया और कहा कि उनके बयान की देशभर के लोगों ने सराहना की। उन्होंने कहा कि इस गीत में असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरणा मिली है।

जनता दल (यू) के देवेश चंद्र ठाकुर ने कहा कि यह गीत भारतीयों के लिए राष्ट्रीय चेतना का उद़घोष बन गया था। यह गीत बंगाल विभाजन से लेकर हर मोर्चे पर देश की आजादी के आंदोलन का प्रेरणागीत बना रहा। यह गीत बताता है कि हमारी भाषाएं अलग अलग हैं लेकिन हम सबके लिए भारत माता की सेवा ही सर्वोपरि है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित