, Dec. 10 -- चर्चा में भाजपा के सामिक भट्टाचार्य ने विपक्ष खास कर कांग्रेस और वाम दलों के सदस्यों के तथ्यों और तर्कों को जोरदार तरीके से खारिज करते हुए कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं कि कांग्रेस ने एक काल खंड में वंदे मातरम् को अपनाया और उसको आगे बढ़ाया लेकिन इसी पार्टी के नेताओं ने कुछ समूहों के दबाव में आकर इसे छोटा भी किया।
श्री भट्टाचार्य ने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति की जिस बैठक में वंदे मातरम् को केवल आंशिक रूप से स्वीकार करने का प्रस्ताव स्वीकार किया गया उससे ठीक पहले नेहरूजी ने नेताओं को लिखा कि 'इस गीत के कुछ हिस्सों में विचारधारा है, मूर्ति चित्रण है और ऐसे रूपक हैं जिसे देश में कुछ वर्ग और समूह के लोग स्वीकार नहीं करते ।"भाजपा सदस्य ने कहा कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस इस गीत को छोटा करने के पक्ष में नहीं थे। कांग्रेस पार्टी इस बहस में गुरुदेव टैगोर की आड़ ले रही है जबकि वह उस समय सक्रिय राजनीति में थे ही नहीं। वह कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से बंगाल के दूसरे नेताओं के माध्यम से संवाद करते थे। उन्होंने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विपक्षी आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि डॉ मुखर्जी और हिंदू महासभा ने उस समय खड़े होकर लड़ाई न लड़ी होती तो आज पश्चिम बंगाल के सांसद यहां इस सभा में नहीं होते।
श्री भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल की स्तारूढ पार्टी पर अवैध घुसपैठ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और कहा कि इससे सीमावर्ती जिलों में जनसंख्या का स्वरूप बदल रहा है।
उन्होंने वामदलों पर हमला करते हुए कहा कि ये पार्टियां भारत को एक राष्ट्र मानती ही नहीं । आजादी के आंदोलन के आखिरी दौर में इन दलों ने भारत को अलग अलग राष्ट्रों के संघ के रूप में निरूपित करने और अल्पसंख्यकों को स्वायत्त निर्णय का अधिकार दिये जाने का समर्थन किया ।
भाजपा के कणाद पुरकायस्थ ने सभी सांसदों से वंदे मातरम् की 150वीं जयंती पर संसद की गरिमा की रक्षा करने के अपने कर्तव्य का पालन करने, देश की एकता और प्रगति के लिए पुन: समर्पित करने का आह्वान किया। डीएमके की सुश्री रजती ने चर्चा में भाग लेते हुए सदन में अपना पहला भाषण दिया। भाजपा के डॉ सुमेर सिंह सोलंकी ने इस गीत को पूरा गाने की व्यवस्था की मांग की। माकपा के ए ए रहीम ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) ने कभी स्वाधीनता आंदोलन में भाग नहीं लिया। भाजपा की डॉ संगीता बलवंत ने आजादी की लड़ाई में जोश भरने में वंदे मातरम् की भूमिका का उल्लेख किया।
जोस के मणि ने कहा कि भाजपा इस बहस के जरिए राजनीति कर रही है और स्वतंत्रता आंदोलन पर अपना अधिकार जताना चाहती है जबकि उनका उसमें कोई योगदान नहीं था। सत्तापक्ष इसके जरिए वास्तविक समस्याओं से लोगों का ध्यान भटकाना चाहती है। भाजपा महाराजा संजओवा लीशंबा और भारत राष्ट्र समिति के रविचंद्र वद्दीराजू ने भी इस गीत की महिमा का उल्लेख किया।
राकांपा (शरद पवार) की डॉ फौजिया खान ने अपने भाषण की शुरुआत वंदे मातरम के उद्घोष से साथ किया लेकिन कहा कि इसे किसी पर थोपा नहीं जाना चाहिएभाजपा के डॉ अनिल सुखदेवराव बोडे ने कहा कि कांग्रेस का भारत की आध्यात्मिक शक्ति से विरोध रहा है। उन्होंने कहा कि औरंगजेब के खिलाफ लड़ाई में शिवाजी का युद्धघोष 'जय भवानी' था। इसी पार्टी की ममता मोहंता ने कहा कि वंदे मातरम् हमारे अस्तित्व से जुड़ा है।
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