नयी दिल्ली , जनवरी 15 -- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तथा राज्यसभा में उपसभापति हरिवंश ने जन आकांक्षाओं पर खरा उतरने की संसदीय चुनौतियों से निपटने के लिए राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों तथा पीठासनी अधिकारियों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुभव साझा करने की जरूरत पर बल दिया और कहा कि इससे समाज के हर वर्ग तक कल्याण की योजनाओं का लाभ पहुंचेगा और संसदीय प्रक्रिया को ज्यादा विचार विमर्श तथा पारदर्शी बनाया जा सकेगा।

श्री बिरला तथा श्री हरिवंश ने गुरुवार को यहां संसद भवर परिसर के संविधान सदन में 28वें राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों तथा पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र अपनी उन खूबियों से बना है जिसमें समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण की योजनाओं पर निष्पक्ष विचार विमर्श होता है और फिर उसका पूरा लाभ समाज के हर वर्ग को मिलता है। उनका कहना था कि यही कारण है कि भारत आज दुनिया में लोकतंत्र का नेतृत्व कर रहा है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व नेतृत्व में हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया निरंतर मजबूत हो रही है।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत को लोकतंत्र की जननी कहा जाता है और लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं को मजबूत करने में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन संसदीय सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने का प्रभावी मंच है और इसमें जो सुधार हुए हैँ उसी का परिणाम है कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है।

भारत की संसद ने सात दशकों से अधिक की यात्रा में जन-केंद्रित नीतियों, कल्याणकारी कानूनों और निष्पक्ष निर्वाचन प्रणाली के माध्यम से लोकतंत्र को सशक्त बनाया है, जिससे प्रत्येक नागरिक की लोकतंत्र में भागीदारी सुनिश्चित हुई है और इससे लोकतंत्र में लोगों की आस्था बढ़ी है।

श्री बिरला ने कहा कि संसद और सरकार के साझा प्रयासों से अनावश्यक कानूनों को हटाया गया और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप नीतियाँ बनाई गईं, जिसके परिणामस्वरूप देश आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य की ओर दृढ़ता से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने एआई और सोशल मीडिया ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की दक्षता-कार्यकुशलता का जिक्र किया और कहा कि इनके दुरुपयोग से गलत सूचना और सामाजिक विभाजन जैसी चुनौतियाँ भी सामने आई हैं इसलिए नैतिक एआई और जिम्मेदार सोशल मीडिया समय की आवश्यकता है। उनका कहना था कि भारत की संसद और विधान मंडलों में डिजिटल तकनीक और एआई का उपयोग बढ़ रहा है। पेपरलेस व्यवस्था और साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म ने पारदर्शिता, दक्षता और उत्तरदायित्व की नई मिसाल कायम की है।

लोकसभा अध्यक्ष ने संसदों की निष्पक्षता और जनता के विश्वास को लोकतंत्र की आत्मा बताया और भारत में आयोजित इस 28वें सम्मेलन में रिकॉर्ड भागीदारी के लिए राष्ट्रमंडल देशों का आभार व्यक्त किया।

श्री हरिवंश ने कहा भारत की संसदीय व्यवस्था संवाद, बहस और असहमति की प्राचीन परंपरा से अपनी ताकत प्राप्त करती है और यह वे मूल्य हैं जो सच्चे लोकतंत्र के केंद्र में हैं। भारत में प्रतिनिधि और विचार-विमर्श करने वाली संस्थाएँ सहस्राब्दियों से अस्तित्व में हैं और फल-फूल रही हैं। दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों से आप सभी का यहां उपस्थित होना भारत के मार्गदर्शक दर्शन वसुधैव कुटुम्बकम् यानी दुनिया एक परिवार है को मजबूती प्रदान करता है। उनका कहना था कि इस मंच से अनुभवों का आदान-प्रदान कर सर्वोत्तम प्रक्रिया को साझा कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के सामने जो चुनौतियां आती हैं उनके समाधान के लिए सामूहिक विचार कर विधायी निगरानी को मजबूत करते हुए समावेशिता को बढ़ावा देने में इस मंच की अहम भूमिका हो सकती है। अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के रूप में हमारी भूमिका विधायिकाओं की गरिमा को बनाए रखने, कार्यवाही में निष्पक्षता सुनिश्चित करने और लोकतांत्रिक मानदंडों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण है।

राज्यसभा के उपसभापति ने कहा कि सदन के अध्यक्ष के नाते हमें इस बात पर ध्यान देना होगा कि हमारा नेतृत्व जीवंत हो, उत्तरदायित्व से भरा हो और भविष्योन्मुखी संसदों को पोषित करने में केंद्रित हो तो इससे जनता की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित किया जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सम्मेलन के दौरान होने वाली बातचीत संसदीय सहयोग को और मजबूत करेगी, आपसी सीखने को बढ़ावा देगी और लोकतांत्रिक शासन की उन्नति में सार्थक योगदान देगी।

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