चंडीगढ़ , फरवरी 10 -- केंद्रीय पंजाबी लेखक संघ (पंजीकृत) ने केंद्र सरकार की प्रतिकूल नीतियों के विरोध में 12 फरवरी को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल होने का निर्णय लिया है।
केंद्रीय पंजाबी लेखक सभा के अध्यक्ष दर्शन बुट्टर , महासचिव सुशील दोसांझ , वरिष्ठ उपाध्यक्ष मक्खन सिंह कुहार और कार्यालय सचिव दीप देविंदर सिंह ने मंगलवार को यहां जारी एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि यह हड़ताल केंद्र सरकार की उन नीतियों के खिलाफ है जो देश की अर्थव्यवस्था , किसानों , श्रमिक वर्ग और कल्याणकारी योजनाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा रही हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बिजली विधेयक 2025 , बीज विधेयक 2025 और एनआरईजीए योजना की संरचना में हानिकारक बदलाव किए जा रहे हैं। इसके साथ ही चार श्रम कानूनों को निरस्त करके उनके स्थान पर श्रम-समर्थक कानून लागू किए जाने चाहिये।
नेताओं ने भारत और अमेरिका के बीच अनुचित व्यापार समझौते पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की । उन्होंने कहा कि यह समझौता देश की अर्थव्यवस्था और विशेष रूप से इसके लिए घातक साबित हो सकता है। छोटे किसान , छोटे उत्पादक और स्वदेशी उद्योग इससे प्रभावित होगा और देश विनाश की ओर अग्रसर होगा। इसलिए, इस समझौते को तत्काल समाप्त कर देना चाहिए।
इन नेताओं ने कहा कि जन संगठनों , किसानों , श्रमिकों , कर्मचारियों और लेखकों को उपरोक्त सभी मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए। केंद्रीय पंजाबी लेखक संघ ने सभी लेखकों , विद्वानों और विचारकों से इस हड़ताल में सक्रिय रूप से भाग लेने और लोकतंत्र , सामाजिक न्याय और जनहित नीतियों के पक्ष में अपनी आवाज उठाने का आग्रह किया ।
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