आइजोल , फरवरी 02 -- मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने सोमवार को यहां पखवाड़े भर चलने वाले तेल और गैस संरक्षण जागरूकता अभियान 'सक्षम 2025-26' का उद्घाटन किया।
इस अभियान का आयोजन इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) द्वारा 'तेल बचाएं, हरित बनें' विषय के तहत किया जा रहा है।
श्री लालदुहोमा ने उद्घाटन कार्यक्रम में कहा कि भारत आयातित ऊर्जा पर भारी निर्भर बना हुआ है। देश की तेल तथा गैस आवश्यकताओं का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा किया जाता है। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत वर्तमान में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल और गैस उपभोक्ता है, जो उर्जा के संरक्षण और कुशल उपयोग को और भी जरूरी बना देता है।
मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि तेल और गैस का अंधाधुंध उपभोग वायु प्रदूषण को खतरनाक रूप से बढ़ावा देता है, क्योंकि इससे कार्बन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें निकलती हैं। उन्होंने कहा कि इन उत्सर्जनों का न केवल मानव स्वास्थ्य पर सीधा और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है, बल्कि ये जंगलों, बांसों, मिट्टी की गुणवत्ता और प्राकृतिक पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाते हैं।
श्री लालदुहोमा ने कहा कि तेल और गैस का संरक्षण न केवल एक आर्थिक आवश्यकता है, बल्कि एक पर्यावरणीय अनिवार्यता भी है। गैर-नवीकरणीय संसाधन होने के नाते तेल और गैस की आवश्यकता भावी पीढ़ियों को भी होगी, जिससे वर्तमान समय में संरक्षण बच्चों के कल्याण में एक निवेश जैसा है।
मुख्यमंत्री ने मिजोरम में तेल और गैस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे कदमों का जिक्र करते हुए कहा कि आइजोल में घरेलू गैस पाइपलाइन कनेक्शन प्रदान करने के प्रयास चल रहे हैं। त्रिपुरा से पाइपलाइन निर्माण लगातार प्रगति कर रहा है।
राज्य के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले के मंत्री बी. लालछनज़ोवा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार राज्य भर में रसोई गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि असम सीमा के पास कोलासिब जिले में मुअलखांग गैस बॉटलिंग प्लांट का वर्तमान में उन्नयन किया जा रहा है और निर्माण कार्य जारी है।
उन्होंने कहा कि सरकार राज्य के भीतर एक तेल डिपो स्थापित करने की दिशा में भी काम कर रही है। 'सक्षम 2025-26' अभियान के हिस्से के रूप में, अगले दो हफ्तों में पूरे मिजोरम में तेल और गैस संरक्षण पर विभिन्न जागरूकता गतिविधियां और संपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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