लखनऊ , दिसंबर 22 -- किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में लव जिहाद का मामला सामने आने के बाद सोमवार को विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) एवं बजरंग दल के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने कुलपति को ज्ञापन सौंप कर जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की।

अवध प्रांत संगठन मंत्री विजय प्रताप, जिला अध्यक्ष सुभाष शर्मा के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के बाद कुलपति प्रो सोनिया नित्यानंद को सौंपे गए ज्ञापन में संगठन ने दावा किया कि हाल के दिनों में समाचार पत्रों व अन्य माध्यमों से यह जानकारी सामने आई है कि मेडिकल विश्वविद्यालय परिसर में कथित लव जिहाद से जुड़े मामले बढ़ रहे हैं, जो अत्यंत गंभीर विषय है। संगठन ने मांग की कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष और त्वरित जांच कराई जाए और यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित व्यक्तियों को विश्वविद्यालय परिसर में प्रतिबंधित कर स्थायी रूप से बाहर किया जाए।

संगठन ने पैथोलॉजी प्रथम वर्ष के एक रेजिडेंट छात्र से जुड़े कथित प्रकरण का भी ज्ञापन में उल्लेख किया। आरोप है कि उक्त छात्र द्वारा विश्वविद्यालय में अध्ययनरत एक हिंदू छात्रा को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जिसके कारण छात्रा ने आत्महत्या का प्रयास किया। संगठन का कहना है कि पूर्व में भी संबंधित छात्र द्वारा धर्म परिवर्तन से जुड़ा मामला सामने आया था। इस प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच, छात्र का प्रवेश निरस्त करने और समिति गठित कर जिम्मेदार व्यक्तियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की गई।

ज्ञापन में कहा गया कि शिक्षक समाज में आदर्श माने जाते हैं, लेकिन यदि कोई शिक्षक या कर्मचारी पद का दुरुपयोग करता है या आचरण के अनुरूप व्यवहार नहीं करता, तो इसकी जांच होनी चाहिए। संगठन ने यह भी मांग रखी कि विश्वविद्यालय परिसर में किसी प्रकार का कथित संगठित नेटवर्क (सिंडिकेट) सक्रिय तो नहीं है, इसकी भी जांच कराई जाए।

संगठन ने विश्वविद्यालय में ड्रेस कोड का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि कक्षाओं में चेहरा ढककर आने से पहचान में समस्या होती है और इससे भय का माहौल बन सकता है। इस संबंध में स्पष्ट नियम बनाकर कक्षाओं के भीतर चेहरा ढककर आने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई।

ज्ञापन में आउटसोर्सिंग के माध्यम से की जा रही नियुक्तियों की भी जांच की मांग की गई, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी विशेष वर्ग को अनुचित लाभ न दिया जा रहा हो और नियुक्तियों में पारदर्शिता बनी रहे।

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