लखीसराय , मार्च 24 -- बिहार के लखीसराय जिले में मंगलवार को फरोग-ए-उर्दू सेमिनार, कार्यशाला एवं मुशायरा" का भव्य आयोजन हुआ। टाउन हॉल, केआरके मैदान, लखीसराय में "फरोग-ए-उर्दू सेमिनार, कार्यशाला एवं मुशायरा" का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मंत्रिमंडल, सचिवालय विभाग, उर्दू निदेशालय, पटना (बिहार) के तत्वावधान में, जिला प्रशासन लखीसराय के सौजन्य से तथा जिला उर्दू भाषा कोषांग, लखीसराय की निगरानी में आयोजित किया गया।
इस अवसर पर जिले के कई गणमान्य पदाधिकारी, शिक्षाविद, साहित्यकार एवं उर्दू भाषा से जुड़े विद्वान उपस्थित रहे।
लखीसराय जिले के सात पंचायत के टीवी मुक्त घोषित होने के उपलब्धि पर आज विश्व यक्ष्मा दिवस के अवसर पर पंचायत के मुखिया को जिला पदाधिकारी मिथिलेश मिश्र ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम का संचालन मोहम्मद शकील ने अत्यंत प्रभावशाली एवं सुव्यवस्थित ढंग से किया गया। स्वागत भाषण सुश्री प्रियंका कुमारी, प्रभारी पदाधिकारी, जिला उर्दू भाषा कोषांग ने प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने उर्दू भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया।
सेमिनार एवं कार्यशाला सत्र के दौरान उर्दू भाषा के विकास, संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। जिला पदाधिकारी सहित अन्य अधिकारियों ने अपने संबोधन में उर्दू भाषा की समृद्ध परंपरा, साहित्यिक योगदान एवं सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उर्दू भाषा भारत की गंगा-जमुनी तहजीब की प्रतीक है और इसके विकास के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए।
कार्यक्रम में उपस्थित उर्दू शिक्षाविदों एवं विद्वानों ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने उर्दू भाषा की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों एवं संभावनाओं पर चर्चा करते हुए कई महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए, जिससे भाषा के विकास को नई दिशा मिल सके।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मुशायरा रहा, जिसमें भागलपुर, मुंगेर एवं लखीसराय से आए प्रसिद्ध शायरों इकराम हुसैन साद, सैयद इसराफील, कमरान अलवी, डॉ. नूतन कुमारी सहित अन्य कवियों ने अपनी बेहतरीन शायरी प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी रचनाओं को श्रोताओं ने खूब सराहा।
समापन अवसर पर उपस्थित लोगों ने इस आयोजन को ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बताते हुए इसकी सराहना की।
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