जगदलपुर , मार्च 13 -- छत्तीसगढ़ की राजकुमारी कश्यप ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से गरीबी की बेड़ियों को तोड़कर स्वावलंबन का एक नया इतिहास रचा है।

बस्तर के विकासखंड दरभा अंतर्गत ग्राम लेंड्रा की निवासी राजकुमारी की जीवन यात्रा संघर्ष और आत्मविश्वास का एक जीवंत उदाहरण है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्व-सहायता समूह से जुड़ने से पहले राजकुमारी का जीवन अनिश्चितताओं से भरा था। उनके पास कोई स्थायी रोजगार नहीं था और वे अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए खेतों में मजदूरी करने या जंगलों से प्राप्त वनोपज एवं अन्य संसाधनों पर निर्भर थीं। उस दौर में वे न केवल गंभीर आर्थिक तंगी से जूझ रही थीं, बल्कि उनके पास भविष्य के लिए कोई ठोस योजना भी नहीं थी।

जिला जन सम्पर्क अधिकारी (पीआरओ) से शुक्रवार को मिली जानकारी के अनुसार,राजकुमारी के जीवन में बदलाव की शुरुआत बिहान योजना के माध्यम से हुई, जब वे 11 वर्ष पूर्व 2015 में सूरजमुखी महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से मिलने वाले प्रशिक्षणों ने न केवल उनके भीतर आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा जगाई, बल्कि उन्हें अपनी समस्याओं के खिलाफ मुखर होना भी सिखाया। धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया और उन्होंने पशुपालन, चूजा ब्रुडिंग इकाई तथा राशन दुकान के संचालन जैसे विविध व्यवसायों को अपनी आजीविका के रूप में अपनाया। आज वे एक कुशल पशुपालन उद्यमी के रूप में न केवल अपने ब्लॉक, बल्कि अन्य विकासखंडों में भी चूजों की सप्लाई और पशुओं के टीकाकरण का कार्य सफलतापूर्वक कर रही हैं।

राजकुमारी की यह उद्यमशीलता उनके जीवन में एक बड़ी क्रांति लेकर आई है। कभी दूसरों के घर मजदूरी करने वाली राजकुमारी की वार्षिक आय अब चार लाख रुपए के आसपास पहुँच गई है, जो इस दौरान लगभग दस गुना बढ़ी है। इस आर्थिक समृद्धि ने उनके परिवार का जीवन स्तर पूरी तरह बदल दिया है। कभी कच्चे मकान में रहने वाली राजकुमारी ने अब अपना पक्का मकान बना लिया है। आज उनके पास खेती के लिए एक ट्रैक्टर, परिवार के लिए दो मोटरसाइकिल और आवागमन की सुविधा के लिए एक चार पहिया कार भी है।

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