मुंबई , फरवरी 06 -- भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को कहा कि अर्थव्यवस्था इस समय अच्छी स्थिति में है, खुदरा मुद्रास्फीति की दर नीचे बनी हुई है और इसे देखते हुए आने वाले लंबे समय तक रेपो दर निचले स्तर पर बनी रहेगी।
श्री मल्होत्रा ने यहां मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिन की द्विमासिक बैठक के बाद संवाददाताओं के सवालों के जवाब देते हुए कहा, "हम अच्छी स्थिति में हैं, मुद्रास्फीति, विशेषकर कोर मुद्रास्फीति, कम बनी हुई है। लंबे समय तक नीतिगत दरें निचले स्तर पर रहेंगी। इसमें और कमी होगी या नहीं यह मैं एमपीसी पर छोड़ता हूं।"एमपीसी की बैठक में सर्वसम्मति से रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया गया। समिति ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर का अनुमान 7.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत कर दिया।
मौद्रिक नीति संबंधित बयान जारी करते हुए श्री मल्होत्रा ने कहा कि भू-राजनैतिक तनाव बढ़ा हुआ है और वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ रहा है। इस बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ व्यापार समझौतों से इसे और गति मिलने की संभावना है।
रेपो दर के साथ अन्य नीतिगत दरों को भी यथावत रखा गया है। स्टैंडिग डिपोजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) और लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी (एलएएफ) की दर पांच प्रतिशत पर तथा मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी और बैंक रेट 5.50 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखी गयी है। समिति ने भविष्य के लिए रुख पहले की तरह तटस्थ बनाये रखा है।
आरबीआई गवर्नर ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि रुख तटस्थ रहने का मतलब है कि समिति निकट भविष्य में रेपो दर को इसी स्तर पर बनाये रखने के पक्ष में है। समिति से छह में से पांच सदस्यों ने रुख को तटस्थ बनाये रखने की वकालत की जबकि एक सदस्य ने इसे नरम करने का प्रस्ताव दिया था।
समिति ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत कर दिया है। उसने बताया वास्तविक सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) 7.3 प्रतिशत रहेगा। साथ ही अगले वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर क्रमशः 6.9 प्रतिशत और सात प्रतिशत किया है।
यह देखते हुए कि आधार वर्ष 2024 पर खुदरा मुद्रास्फीति के पहले आंकड़े 12 फरवरी को और जीडीपी के नये आंकड़े 27 फरवरी को जारी किये जायेंगे, रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वृद्धि दर का अनुमान जारी नहीं किया है। श्री मल्होत्रा ने कहा कि अगले वित्त वर्ष का जीडीपी वृद्धि अनुमान अप्रैल की बैठक के बाद जारी किया जायेगा।
केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में खुदरा महंगाई 3.2 प्रतिशत पर और पूरे वित्त वर्ष के दौरान 2.1 प्रतिशत पर रहने का अनुमान व्यक्त किया है। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए खुदरा महंगाई का अनुपात बढ़ाकर चार प्रतिशत और दूसरी तिमाही के लिए 4.2 प्रतिशत किया गया है। श्री मल्होत्रा ने बताया कि इसकी मुख्य वजह सोने-चांदी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी है।
एक प्रश्न के उत्तर में श्री मल्होत्रा ने कहा कि बैंकिंग तंत्र में नकदी की उपलब्धता सुनिश्चित करना आरबीआई की जिम्मेदारी है और वह पूर्वानुमान के आधार पर उसके लिए समय रहते उपाय कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह एक सतत प्रक्रिया है और एमपीसी की पिछली बैठक के बाद घोषित उपायों के अलावा भी केंद्रीय बैंक ने जनवरी में भी नकदी बढ़ाने के उपाय किये।
आरबीआई ने कहा कि भू-राजनैतिक अनिश्चितता अब भी ऊंची बनी हुई है और व्यापार तनाव भी बढ़ रहा है। इस सबके बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के सभी कारक मजबूत हैं। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ा है। वस्तु निर्यात में भी तीसरी तिमाही में 1.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हालांकि वस्तु आयात में भी 7.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, लेकिन सेवा क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन और विदेशों में रहने वाले भारतीय द्वारा मनीऑर्डर में वृद्धि से चालू खाते का घाटा कम बना हुआ है। विदेशी मुद्रा भंडार का स्तर 11 महीने के वस्तु आयात और दशकों के चालू खाते के घाटे की भरपाई के लिए पर्याप्त है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार संधियों (एफटीए) से निर्यात का बढ़ावा मिलेगा। सरकार ने कई देशों और क्षेत्रों के साथ एफटीए किये हैं जिससे देश में निवेश भी आयेगा। इन सभी कारकों को देखते हुए आगे भी अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज बनी रहेगी।
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