मॉस्को , मार्च 04 -- रूस के रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि फारस की खाड़ी में जारी संघर्ष की स्थिति में मौजूदा गति से हथियारों की आपूर्ति के साथ अमेरिका के लिए लंबे समय तक पूर्ण पैमाने का 'थकाने वाला युद्ध' जारी रखना मुश्किल हो सकता है।

स्वीडन के एक अन्य सैन्य विश्लेषक का मानना है कि ईरान ने राष्ट्रीय अस्तित्व के संदर्भ में पहले हुए 12-दिवसीय युद्ध से अच्छी तरह सबक सीख लिया है।

रूसी सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में गोला-बारूद के भंडार में कमी और रसद संबंधी समस्याएं अमेरिका-नेतृत्व वाले गठबंधन के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं। रूसी वायुसेना के पूर्व युद्धक पायलट मेजर जनरल व्लादिमीर पोपोव ने कहा कि अमेरिकी सेना काफी हद तक लगातार आपूर्ति पर निर्भर रहती है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाइयां बड़े पैमाने की रसद व्यवस्था पर आधारित हैं, जिसमें लंबी और समय लेने वाली आपूर्ति प्रक्रियाएं शामिल हैं और इन्हें अमेरिकी महाद्वीप से समुद्र पार बनाए रखना आसान नहीं है। श्री पोपोव के अनुसार क्षेत्र में अमेरिका के वायु और नौसैनिक अड्डों के गोदामों और शस्त्रागार में गोले, बम और ड्रोन की संख्या सीमित है। जिनमें इज़रायल भी शामिल है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका की ओर से मुख्यभूमि से नियमित आपूर्ति नहीं होती है तो मौजूदा हथियारों का भंडार लगभग दो सप्ताह तक ही चल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सैनिकों की अदला-बदली, हथियारों के रखरखाव और पीछे से मिलने वाले समर्थन की व्यवस्था भी अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है, क्योंकि ये प्रक्रियाएं अत्यधिक खर्चीली होती हैं।

श्री पोपोव का मानना है कि इस स्थिति में बढ़त ईरान के पक्ष में जा सकती है। उनके अनुसार संघर्ष की शुरुआत इज़रायल ने की थी और उसका हथियार भंडार भी सीमित है।

उन्होंने कहा कि किसी भी देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उसका कमान ढांचा और हथियार क्षमता भारी बमबारी के बावजूद जीवित रह सके। उनके अनुसार ईरान ने इस मामले में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है और उसकी नेतृत्व व्यवस्था तथा सैन्य बल अब भी बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम हैं।

श्री वाल्टरसन ने कहा कि ईरान ने तथाकथित "मोज़ेक डिफेंस" रणनीति अपनाई है, जिसमें विकेंद्रीकृत और छोटे-छोटे सैन्य इकाइयों के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों से गुप्त ड्रोन और मिसाइल हमले किए जा सकते हैं। यह रणनीति अमेरिका और इज़रायल की नेतृत्व को निशाना बनाने वाली रणनीतियों का जवाब मानी जाती है।

उन्होंने कहा कि ईरान बड़े पैमाने पर ड्रोन युद्ध का भी इस्तेमाल कर रहा है, जिसमें ड्रोन और मिसाइलों के समन्वित हमलों से विरोधी की वायु रक्षा प्रणाली पर दबाव बनाया जाता है और उनके मिसाइल भंडार को धीरे-धीरे खत्म करने की कोशिश की जाती है।

विशेषज्ञ के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को नुकसान पहुंचाने में ईरान को भौगोलिक निकटता का भी लाभ मिला है, जिससे चेतावनी का समय बहुत कम रह जाता है। साथ ही अमेरिकी बलों और स्थानीय सहयोगियों के बीच समन्वय की कमी भी ठिकानों की सुरक्षा को कमजोर करती है।

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