जयपुर , अप्रैल 16 -- राजस्थान स्टेट रोडवेज एम्पलाईज यूनियन (एटक ) के बैनर तले रोडवेज के बड़ी संख्या में सेवारत एवं सेवानिवृत कामगारों ने गुरुवार को जयपुर में प्रदेश स्तरीय धरना दिया।

रोडवेज के मुख्यालय पर आयोजित धरना "रोडवेज बचाओ - रोजगार बचाओ" नारे के साथ रोडवेज संस्थान, सेवारत कामगारों एवं सेवानिवृत कामगारों के व्यापक हितों की ग्यारह सूत्री मांगों के समर्थन में दिया गया।

इस अवसर पर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष एम.एल. यादव ने कहा कि एक समय में रोडवेज में 25 हजार से ज्यादा कामगार एवं 4 हजार 500 से ज्यादा रोडवेज की खुद की बसें होती थी। वसुंधरा राजे की सरकार के समय से निजी बस मालिकों को पनपाने के लिये रोडवेज के प्रति अपनाई गई दुर्लक्षता की नीति अशोक गहलोत की सरकार में चलते हुये वर्तमान भजन लाल शर्मा की सरकार में भी जारी है।

श्री यादव ने कहा कि इसके दुष्परिणाम स्वरूप इस समय 10 हजार कामगार एवं रोडवेज की खुद की 2 हजार 580 बसें ही रह गई हैं, जिनमें 850 वे बहुत पुरानी बसें भी शामिल हैं, जो नकारा श्रेणी में पहुंच चुकी हैं। राज्य सरकार द्वारा जन सुविधा के लिये रोडवेज की खुद की पर्याप्त बसों के लिये धन राशि उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के कारण रोडवेज प्रबंधन निजी बस मालिकों की बसों को रोडवेज में अनुबंध पर लेता जा रहा है। यह रोडवेज के वजूद के लिये भारी खतरा है।

उन्होंने कहा कि रोडवेज को बचाने के लिये 15 हजार रिक्त पदों पर नई भर्ती एवं दो हजार 500 नई बसों की खरीदने की जरूरत है। यादव ने कहा कि कामगारों की भारी कमी के कारण चालकों एवं परिचालकों से कानूनन प्रतिदिन के आठ घंटे के निर्धारित कार्य के बजाय 12 घंटे से 16 घंटे तक का कार्य लिया जा रहा है, जिसका अतिरिक्त वेतन नहीं दिया जाता, समय पर साप्ताहिक विश्राम नहीं दिया जाता एवं अन्य अवकाश समय पर नहीं दिये जाते।

उन्होंने रोडवेज प्रबंधन का यह कृत्य केवल चालकों एवं परिचालकों का मानसिक, शारीरिक, आर्थिक शोषण ही नहीं, बल्कि मोटर परिवहन कामगार अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत आर्थिक जुर्माने या जेल की सजा अथवा इन दौनों से दंडनीय अपराध है। यादव ने कहा कि 30 से 35 साल की सेवा के उपरान्त गत 10 साल की अवधि में बड़ी संख्या में सेवानिवृत हुये चालकों एवं परिचालकों के अधिश्रम भते, साप्ताहिक अवकाश एवं सवैतनिक अवकाश के बकाया भुगतान नहीं हो रहा हैं।

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