नयी दिल्ली , फरवरी 04 -- रेल मंत्रालय ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ मिल कर रेलवे ट्रैक पर दुर्घटना में हाथियों की मौत की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा के कई उपाय किये हैं।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि इसके लिए ध्वनि प्रसारक सेंसर (डीएएस) का उपयोग करके रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मौजूदगी का पता लगाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमता से युक्त घुसपैठ का पता लगाने की प्रणाली विकसित की गयी है। हाथियों की आवाजाही का पता लगाने वाली इस प्रणाली (आईडीएस) का विकास किया गया है जिसके कंपोनेंट्स में ऑप्टिकल फाइबर, हार्डवेयर और हाथी की चाल के पहले से इंस्टॉल किए गए सिग्नेचर शामिल हैं। यह प्रणाली लोको पायलट, स्टेशन मास्टर और नियंत्रण कक्ष को रेलवे ट्रैक के पास हाथियों की आवाजाही के बारे में चेतावनी जारी करने के लिए तैयार की गयी है, ताकि समय पर निवारक कार्रवाई की जा सके।

मौजूदा समय में आईडीए प्रणाली उत्तर-पूर्व सीमांत रेलवे में वन विभाग द्वारा पहचाने गए संवेदनशील स्थानों पर 141 आरकेएमएस पर काम कर रहा है। आईडीएस के काम को भारतीय रेलवे में पहचाने गए गलियारे के लिए भी मंज़ूरी दी गई है, जिसमें उत्तर सीमांत रेलवे (403.42 आरकेएमएस), पूर्वी तटीय रेलवे (368.70 आरकेएमएस), दक्षिण रेलवे (55.85 आरकेएमएस), उत्तर रेलवे (52 आरकेएमएस), दक्षिण पूर्व रेलवे (55 आरकेएमएस), उत्तर पूर्व रेलवे (99.18 आरकेएमएस), पश्चिम रेलवे (115 आरकेएमएस) और पूर्व मध्य रेलवे (20.3 आरकेएमएस) शामिल हैं।

वहीं, ट्रेन से हाथी के टकराने की किसी भी घटना के मामले में मंडल रेलवे वन विभाग के साथ मिलकर मामले की जांच करता है और उसी के अनुसार तत्काल कदम उठाता है। इसमें पहचाने गए स्थानों पर उचित गति प्रतिबंध लगाना और ट्रेन क्रू के साथ-साथ स्टेशन मास्टर्स को अलर्ट करना शामिल है। ट्रेन क्रू को अपडेट और जागरूक करने के लिए संबंधित वन अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें आयोजित की जाती हैं। पिछले पांच वर्षों में औसतन लगभग 16 घटनाएं रिपोर्ट की गई हैं।

इस घटनाओं को रोकने के लिए पहचाने गए स्थानों पर हाथियों की आवाजाही के लिए अंडरपास और रैंप का निर्माण, संवेदनशील स्थानों पर ट्रैक के किनारे उपयुक्त बाड़ लगाना ताकि हाथियों को रेलवे लाइनों के पास आने से रोका जा सके, सभी पहचाने गए हाथी गलियारों पर साइनबोर्ड लगाना ताकि लोको पायलटों को पहले से चेतावनी दी जा सके और रेलवे भूमि के भीतर ट्रैक के आसपास की वनस्पति और खाने योग्य वस्तुओं को हटाना शामिल है।

इसके अलावा वन क्षेत्र में सोलर प्रणाली के साथ एलईडी लाइटें लगाना, वन विभाग द्वारा नियुक्त हाथी ट्रैकर्स को तैनात किया जाता है ताकि स्टेशन मास्टर और लोको पायलटों को अलर्ट करके समय पर कार्रवाई की जा सके और रेलवे ट्रैक के पास जंगली जानवरों/हाथियों की आवाजाही को रोकने के लिए, लेवल क्रॉसिंग पर इनोवेटिव मधुमक्खी बज़र डिवाइस लगाए गए हैं। यह उपकरण जिस तरह की आवाज़ निकालता है, वह हाथियों को रेलवे ट्रैक से दूर भगाने का काम करती है।

इसके साथ ही रात में/कम दृश्यता में सीधी पटरी पर जंगली जानवरों की मौजूदगी का पता लगाने के लिए थर्मल विजन कैमरे का भी ट्रायल किया जा रहा है, जो लोको पायलटों को जंगली जानवरों की मौजूदगी के बारे में अलर्ट करता है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित