, March 16 -- डीएमके के केई प्रकाश ने केंद्र सरकार पर रेलवे के साथ विश्वासघात करने का अरोप लगाया और कहा कि वह रेलवे परियोजनाओं को पूरा नहीं करती है और लोगों की मांग नजरअंदाज करती है। उन्होंने रेलवे पर माल ढुलाई में कुप्रबंधन का भी आरोप लगाया और कहा कि इस वजह से सड़क मार्ग से माल ढुलाई करने को लोगों को बाध्य होना पड़ता है जिसके कारण ढ़ुलाई का खर्च बढ़ता है और सामान महंगा होता है। उन्होंने कहा कि रेलवे स्टेशनों पर शिकायत पंजिकाएं रखी होती हैं लेकिन हम डिजिटल इंडिया की बात करते हैं तो शिकायत भी ऑनलाइन होनी चाहिए और उसका जवाब भी मिलना चाहिए।
श्री प्रकाश कहा कि रेलवे और राष्ट्रीय राजमार्ग की योजनाएं समय पर पूरी हो और दोनों के बीच इसको लेकर समन्वय होना चाहिए। उनका कहना था कि अनारक्षित डिब्बे में 184 लोगों की बैठने की व्यवस्था होती है लेकिन उसमें ढाई सौ से 300 लोग सफर कर रहे होते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि जितनी सीटी होती हैं उतने ही टिकट दी जानी चाहिए और इसके लिए निगरानी व्यवस्था भी होनी चाहिए। उनका कहना था की रेलवे में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए ताकि निगरानी की व्यवस्था की जा सके।
तेलुगु देशम पार्टी के जीएम हरीश बालयोगी रेलवे परियोजनाओं को समय पर पूरा किए जाने की जरूरत पर बल दिया और कहा कि अंतिम छोर तक देश के नागरिकों को रेल की सुविधा मिलनी चाहिए। रेलवे स्टेशनों का विकास पीपीपी मॉडल पर किया जाना चाहिए और आधुनिकीकरण की परियोजनाओं की निगरानी की सख्त व्यवस्था होनी चाहिए। उनका कहना था कि देश में 7000 रेलवे स्टेशन हैं और करोड़ों लोग प्रतिदिन इसका इस्तेमाल करते हैं इसलिए लोगों को सभी जरूरी आधुनिक सुविधाएं दी जानी चाहिए। सरकार जो कर रही है उसमें और भी सुविधाएं देने की व्यवस्था की जा सकती है इससे लोगों को सुविधा भी मिलेगी और रेलवे का राजस्व भी बढेगा। उनका कहना था कि रेल परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जाना चाहिए और देश के हर क्षेत्र को रेलवे से जोड़ा जाना चाहिए।
जनता दल यू के कौशलेंद्र कुमार ने कहा कि रेलवे देश की जीवन रेखा है लेकिन कोरोना काल में इसमें कुछ सुविधाएं कम हुई हैँ। उनका कहना था कि बुजुर्गों, दिव्यांगों, महिलाओं, पत्रकारों तथा अन्य कई श्रेणियों में लोगों रेल सफर के दौरान जो सुविधाएं पहले दी जाती थीं उनको बहाल किया जाना चाहिए। जद यू सांसद ने कहा कि रेलवे की 3टीयर की बोगियां कोरोना के बाद कम हुई हैं जिसके कारण लोगों को दिक्कत हो रही है इसलिए इन बोगियों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।
शिव सेना (यूबीटी) के अरविंद सावंत ने कहा कि रेलवे में बहुत अच्छा काम भी हो रहा है लेकिन कई और कार्याें पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कोंकण रेलवे का मुद्दा भी उठाया और कहा कि वहां ट्रैक बढ़ाने की जरूरत है क्योंकि एक ही ट्रैक पर सभी तरह की रेलें दौड़ रही हैं। पुणे-नासिक रेलवे लाइन पर कुंभ के लिहाज से ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है ताकि कुंभ की भीड़ को संभाला जा सके। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी टर्मिनल का नाम दिया है लेकिन रेलवे स्टेशन पर छत्रपति शिवाजी की मूर्ति नहीं है। उन्होंने महाराष्ट्र में रेलवे स्टेशनों के नाम बदलने का भी मुद्दा उठाया और सरकार से उन सभी रेलवे स्टेशनों के नाम बदलने का आग्रह किया जिनकी मांग की जा रही है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के उमर शरदाराव काले ने कहा कि कोरोना काल में पहले से संचालित कई रेलवे स्टेशनों को बंद कर दिया गया था लेकिन उसके बाद इन रेलवे स्टेशनों को दोबारा चालू नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि सिर्फ उनके क्षेत्र में ही नहीं बल्कि पूरे महाराष्ट्र में कई स्टेशनों का संचालन बंद किया गया था और उनको दोबारा शुरु नहीं किया गया है। उन्होंने रेलवे लाइनों में अंडरपास बनाने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि कई महत्वपूर्ण जगहों पर अंडरपास नहीं हैं और जहां हैं उनमें से कई की स्थिति बहुत खराब है इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
शिव सेना के श्रीरंग आप्पा वारणे ने कहा कि देश में 16 लाख करोड़ रुपए के बुनियादी ढांचा के विकास के तहत जो रेलवे कोरिडोर बनाया जा रहा है यह मोदी सरकार का ऐतिहासिक काम है और इसका देश के आम लोगों को बहुत बड़ा लाभ होगा। उन्होंने कहा कि मुंबई उपनगर में 70 से 80 लाख लोग हर दिन रेलवे से सफर करते हैं और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग रोजगार के सिलसिले में मुंबई पहुंचते हैं। उनका कहना था कि मुंबई के लोगों को ज्यादा सुविधाएं देने के लिए भूमिगत रेलवे लाइन बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पुणे-लोनावाला लोकल ट्रेन पहले चलती थी लेकिन कोरोना के बाद इसे बंद किया गया है। उन्होंने रेल मंत्री से इस रेल को दोबारा शुरु करने का आग्रह किया।
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