नयी दिल्ली , मार्च 03 -- रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देश में पिछले एक दशक में रेल अवसंचना के विस्तार और सुधार में अभूतपूर्व प्रगति की जानकारी देते हुए मंगलवार को कहा कि अवसंरचना विकास के साथ उद्योगों की क्षमता और संसाधानों में विस्तार करने की चुनौती है।

उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में लगभग 35,000 किलोमीटर नई रेल पटरियाँ जोड़ी गई हैं, जो जर्मनी के कुल रेल नेटवर्क से भी अधिक है। श्री वैष्णव ने बजट 2026-27 पर इस वर्ष के दूसरे वेबिनार के एक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में रेलवे के विद्युतीकरण में तेज प्रगति हुई है।

उन्होंने बताया कि लगभग 99 प्रतिशत रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण किया जा चुका है। "आर्थिक वृद्धि को बनाए रखना और सुदृढ़ करना: अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स एवं माल ढुलाई" पर इस वेबिनार का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया।

रेल मंत्री ने अपने संबोधन में तीन प्रमुख प्राथमिकताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरकार का जोर समन्वित तरीके से क्षमता विस्तार, गुणवत्ता एवं योग्यता मानकों को सुदृढ़ करने तथा विवादों में कमी और परियोजनाओं की समयबद्ध पूर्णता के लिए प्रलेखन एवं अनुबंध ढांचे में सुधार पर है।

उन्होंने कहा कि एक दशक में रेलवे के तीव्र विस्तार के साथ एक बड़ी चुनौती भी जुड़ी है- वह है सरकार की ओर से किये गये इस विस्तार के अनुरूप उद्योगों की क्षमता और संसाधनों को बढ़ाना। उन्होंने जोर देकर कहा कि रेलवे का विकास मूलतः सरकार और उद्योग के बीच साझेदारी का परिणाम है। परियोजनाओं के आकार में अचानक वृद्धि या कमी से उद्योग की तैयारी प्रभावित हो सकती है।

श्री वैष्णव ने कहा कि कि कौशल विकास, निगरानी व्यवस्था, गुणवत्ता मानक और तकनीक का उपयोग-इन सभी को अवसंरचना विस्तार के साथ तालमेल में बढ़ाना आवश्यक है। उद्योग जगत से प्राप्त सुझाव भविष्य के सुधारों को दिशा देने में सहायक होंगे।

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