नयी दिल्ली , अप्रैल 05 -- पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की सोमवार से शुरू हो रही तीन दिवसीय बैठक में रेपो दरों में बदलाव की उम्मीद नहीं है।
भारतीय स्टेट बैंक की अनुसंधान इकाई एसबीआई रिसर्च की रविवार को जारी रिपोर्ट में यह बात कही गयी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एमपीसी की पिछली बैठक के बाद से पश्चिम एशिया संकट के रूप में दुनिया में एक बड़ा भू-राजनैतिक बदलाव आया है। विशेषकर हार्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक व्यापार प्रभावित हुआ है। यह साल 1973 के बाद कच्चे तेल के बाजार में सबसे बड़ा व्यवधान है।
रिपोर्ट के अनुसार, कच्चा तेल इस समय 100 डॉलर प्रति बैरल के पार है और रुपया 93 रुपये प्रति डॉलर से नीचे चल रहा है। साथ ही "सुपर अल नीनो" प्रभाव की भविष्वाणी की गयी है। इन सभी कारकों के मद्देनजर आरबीआई फिलहाल सावधानी बरतते हुए 08 अप्रैल को जारी होने वाले बयान में यथास्थिति बरकरार रखेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय पूंजी बाजार से 16.6 अरब डॉलर की शुद्ध निकासी की जो 1991 के बाद सबसे ज्यादा है। अकेले इस साल मार्च में उन्होंने 13.6 अरब डॉलर निकाले जो मार्च 2020 (15.9 अरब डॉलर) के बाद सर्वाधिक है।
रुपया दबाव में है और 114 दिन में इसमें तीन रुपये प्रति डॉलर की गिरावट आ चुकी है। कच्चे तेल की कीमत ऊपर बनी हुई है। इन सबका सम्मिलित परिणाम यह होगा कि अगली तीन तिमाहियों में उपभोक्ता मूल्य आधारित मुद्रास्फीति की दर 4.5 प्रतिशत से अधिक रहेगी।
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