फगवाड़ा , मार्च 16 -- हरियाणा का रहने वाला 25 वर्षीय युवक दीपक, रूस की जेल में साढ़े तीन महीने "नर्क" जैसी स्थितियों में बिताने के बाद अपने परिवार के पास लौट आया है।

दीपक ने सोमवार को सुल्तानपुर लोधी पहुंचकर राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल का व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद किया, जिनके प्रयासों से उसकी रिहाई और वतन वापसी संभव हो सकी है।

जेल में प्रताड़ना का विवरण देते हुए दीपक ने ऐसी बातें साझा कीं जो रोंगटे खड़े कर देती हैं। उसने बताया कि मॉस्को के एक पुलिस स्टेशन में उसे तीन दिनों तक भूखा रखा गया और केवल पानी दिया गया। दीपक के अनुसार, जब भी वह शौचालय जाने की अनुमति मांगता, पुलिस अधिकारी उसे बिजली के तेज झटके देते थे। उसे सप्ताह में दो बार बिजली के झटके दिए जाते थे।

दीपक ने बताया कि वह 22 अप्रैल 2025 को मॉस्को के लिए निकला था। एक ट्रैवल एजेंट ने उससे चार लाख रुपये लिए थे और वादा किया था कि उसे एक कंपनी में 90,000 रुपये प्रति माह की नौकरी मिलेगी। लेकिन एक महीना काम करने के बाद जब उसने वेतन मांगा, तो उसे नौकरी से निकाल दिया गया। बाद में, एजेंट ने 500 किलोमीटर दूर एक अन्य कंपनी में काम लगवाया। वहां भी एक महीने काम करने के बाद उसे वादे के मुताबिक 90,000 रुपये के बजाय केवल 5,000 रुपये दिए गए। दीपक की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई कि उसके पास खाने तक के पैसे नहीं बचे और वह कमरे का किराया भी नहीं दे सका। नतीजा यह हुआ कि मकान मालिक ने उसका पासपोर्ट छीन लिया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया।

पुलिस स्टेशन के बाद उसे 'इमिग्रेशन डिटेंशन जेल' भेज दिया गया। दीपक के अनुसार, वहां विभिन्न देशों के कई युवक बंद थे, जिनमें लगभग 150 भारतीय थे, जिनमें से अधिकांश पंजाब और हरियाणा के थे। उसने बताया कि उसके बगल वाले सेल में क्यूबा के एक युवक ने मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या कर ली थी। इस घटना से सभी कैदी सहम गए थे। दीपक ने कहा कि एक समय उसे भी लगने लगा था कि अगर वह एक महीना और वहां रहा, तो जीवित नहीं बचेगा।

खाने की समस्या पर दीपक ने बताया कि जेल में दोपहर और रात के खाने में उबला हुआ गोमांस परोसा जाता था। चूंकि भारतीय युवक इसे नहीं खाते थे, इसलिए वे केवल ब्रेड के तीन टुकड़ों पर गुजारा करने को मजबूर थे। वहां की परिस्थितियां इतनी खराब थीं कि कई युवकों को सेना में शामिल होना बेहतर विकल्प लगने लगा था।

दीपक के परिवार ने 2 फरवरी को संत बलबीर सिंह सीचेवाल से संपर्क किया। संत सीचेवाल ने तुरंत विभिन्न स्तरों पर प्रयास शुरू किए, जिसके परिणामस्वरूप 17 फरवरी को दीपक सुरक्षित घर लौट सका। भारत लौटने के बाद खराब स्वास्थ्य के कारण दीपक को 10-15 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा।

सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने लोगों से अपील की है कि वे विदेश जाने के लालच में धोखाधड़ी करने वाले ट्रैवल एजेंटों के चंगुल में न फंसें। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "विदेश जाने की होड़ में हमारे युवा अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। कई देशों में स्थिति बेहद खतरनाक है। लोगों को अवैध तरीकों से विदेश जाने से बचना चाहिए।" उन्होंने कहा कि यह केवल एक युवक की कहानी नहीं है, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए एक सबक है जो एजेंटों पर भरोसा करके अपनी जिंदगी दांव पर लगा देते हैं।

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