बेंगलुरु , मार्च 31 -- कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि वैश्विक मुद्रा बाजार में बढ़ती अस्थिरता और रुपए के कमजोर होने से देश के आम आदमी पर विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते असर को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार से सुधारात्मक कदम उठाना चाहिए।

श्री शिवकुमार ने मुद्रा के उतार-चढ़ाव के आर्थिक प्रभावों को लेकर कहा कि डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है और रुपया कमजोर पड़ रहा है। इन उतार-चढ़ावों का, भले ही सरल शब्दों में समझाया जाए, अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने जोर दिया कि मुद्रा की अस्थिरता आयात और निर्यात दोनों को प्रभावित करती है, जिससे देश में सामान और सेवाओं की कुल लागत संरचना प्रभावित होती है। आयात की बढ़ती लागत के कारण जरूरी और रोजमर्रा की वस्तुएँ महंगी हो जाती हैं और यह बोझ अंततः आम नागरिकों पर ही पड़ता है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इसका असर सिर्फ बड़ी उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम परिवारों तक भी पहुँचता है। बढ़ती कीमतों से लोगों की खरीद क्षमता कम हो रही है। उन्होंने सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण खरीदारियों का उदाहरण देते हुए मंगलसूत्र (ताली) का जिक्र किया और बताया कि मुद्रा के उतार-चढ़ाव से जुड़ी महंगाई अब सामान्य और सामाजिक खर्चों को भी प्रभावित कर रही है।

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