नैनीताल , अप्रैल 18 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने रुद्रप्रयाग विधानसभा सीट को आरक्षित न किए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए शनिवार को राज्य चुनाव आयोग से तीन दिन के भीतर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई तीन दिन बाद तय की गई है।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ में हुई।

इस मामले को रुद्रप्रयाग जिले के सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व सैनिक विजय लाल ने जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि राज्य गठन के बाद से अब तक रुद्रप्रयाग विधानसभा सीट को आरक्षित नहीं किया गया है।श जबकि राज्य बने करीब 26 वर्ष हो चुके हैं और अगले वर्ष विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं।

यह भी कहा गया कि रुद्रप्रयाग क्षेत्र में अनुसूचित जाति-जनजाति (एससी-एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लोगों की पर्याप्त आबादी है। इसके बावजूद इस सीट को लगातार सामान्य (जनरल) श्रेणी में रखा गया है, जो इन वर्गों के साथ अन्याय है।

याचिकाकर्ता के अनुसार उन्होंने सीट आरक्षण को लेकर कई बार राज्य चुनाव आयोग और प्रदेश सरकार को प्रत्यावेदन दिए हैं लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

खंडपीठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह तीन दिन के भीतर इस विषय में स्पष्ट स्थिति खंडपीठ के समक्ष रखे।

याचिका में मांग की गई है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए रुद्रप्रयाग सीट को आरक्षित घोषित किया जाए ताकि वंचित वर्गों को प्रतिनिधित्व मिल सके।

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