चंडीगढ़ , अप्रैल 4 -- हरियाणा में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मुकेश कुमार आहूजा को सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद तीन महीने की पुनर्नियुक्ति दिए जाने पर प्रशासनिक हलकों में सवाल उठने लगे हैं। प्रदेश सरकार ने 31 मार्च को सेवानिवृत्त हुए 2009 बैच के आईएएस अधिकारी आहूजा को एक अप्रैल से 30 जून 2026 तक पुनर्नियुक्ति दी है। इस दौरान वह हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के मुख्य प्रशासक और हरियाणा लोक सेवा आयोग के सचिव पद पर बने रहेंगे, जिन पर वह पिछले तीन वर्षों से कार्यरत हैं।
श्री आहूजा मूल रूप से एचसीएस अधिकारी थे और मई 2019 में 22 वर्षों की सेवा के बाद आईएएस में पदोन्नत हुए थे। इससे पहले वह लंबे समय तक अंबाला में एसडीएम के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता हेमंत कुमार ने इस पुनर्नियुक्ति पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि आईएएस (कैडर) नियमावली, 1954 में सेवानिवृत्ति के बाद राज्य सरकार द्वारा पुनर्नियुक्ति का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में जारी आदेश अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिस पर उन्होंने मुख्य सचिव को लिखित आपत्ति भेजी है।
हालांकि, राज्य सरकार पिछले कुछ वर्षों से नियम 9(1)(ए) के तहत अधिकतम तीन महीने के लिए इस प्रकार की नियुक्तियां करती रही है। इस प्रावधान के अनुसार, किसी गैर-कैडर अधिकारी को सीमित अवधि के लिए कैडर पद पर तैनात किया जा सकता है, लेकिन यह सवाल बना हुआ है कि क्या सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी को गैर-कैडर अधिकारी माना जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी 2019 में एक आईएएस अधिकारी को इसी प्रकार तीन महीने की पुनर्नियुक्ति दी गई थी। वहीं, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को केंद्र सरकार द्वारा सेवा-विस्तार दिया गया था, जो पुनर्नियुक्ति से अलग प्रक्रिया है।
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