नयी दिल्ली , अप्रैल 18 -- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को अर्थहीन करार देते हुए आरोप लगया है कि उन्होंने सिर्फ वही पुराने झूठ को दोहराने का प्रयास, जिन्हें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता संसद में बार-बार कहते रहे हैं।

भाकपा के राज्यसभा सांसद पी संदोष कुमार ने शनिवार को कहा कि श्री मोदी के संबोधन में कोई ठोस बात नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में न तो किसी मुद्दे पर स्पष्ट जवाब दिया और न ही कोई जवाबदेही दिखायी। उन्होंने कहा कि उनका यह संबोधन सरकार की विफलताओं से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश मात्र था। साथ ही, उन्होंने चुनाव आचार संहिता लागू होने के बावजूद दूरदर्शन और संसद टीवी जैसे सार्वजनिक प्रसारक माध्यमों का दुरुपयोग किया, जो बेहद गंभीर और निंदनीय है।

भाकपा सांसद ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि महिला आरक्षण कानून 2023 में संसद से सर्वसम्मति से पास हो चुका है, लेकिन सरकार ने इसके लागू होने को जनगणना और परिसीमन से जोड़ दिया। उन्होंने कहा, "पहले शर्तें लगाकर कानून को टालना और फिर उसी ढांचे के साथ तात्कालिकता का दावा करना, यह दोहरे मापदंड का उदाहरण है।" उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार ने 16 अप्रैल की गजट अधिसूचना के जरिए महिला आरक्षण को पहले ही लागू कर दिया है, तो फिर इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की जरूरत क्या थी। उन्होंने इसे "राजनीतिक भ्रम पैदा करने और गतिरोध खड़ा करने की सोची-समझी रणनीति" बताया।

उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का श्रेय लंबे समय से चल रहे जन आंदोलनों और प्रगतिशील ताकतों के संघर्ष को जाता है, न कि किसी एक राजनीतिक दल को।

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