भिण्ड , मार्च 13 -- मध्यप्रदेश के भिण्ड जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग 719 के चौड़ीकरण की मांग को लेकर संत समाज आंदोलन की तैयारी में जुट गया है। इसी क्रम में आज शुक्रवार को भिण्ड शहर के कुंडेश्वर महादेव मंदिर परिसर में संत समाज की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें प्रस्तावित आंदोलन की रणनीति और आगे की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।आधिकारिक जानकारी के अनुसार बैठक के बाद संत समाज के सदस्य भिण्ड जिले के औद्योगिक क्षेत्र मालनपुर पहुंचेंगे, जहां आंदोलन की शुरुआत के संकेत के रूप में धर्मध्वजा स्थापित की जाएगी। इसके साथ ही मालनपुर टोल प्लाजा के पास खालसा यानी डेरा स्थापित करने की तैयारियां भी शुरू की जाएंगी, ताकि आगामी दिनों में प्रस्तावित आंदोलन को संगठित रूप से संचालित किया जा सके।
बताया जा रहा है कि संत समाज द्वारा मालनपुर टोल प्लाजा पर 'नो रोड-नो टोल' के नारे के साथ 16 मार्च से अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इस आंदोलन के माध्यम से संत समाज और स्थानीय लोग राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण की मांग को लेकर सरकार और संबंधित एजेंसियों का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं।
आज होने वाली बैठक में यह भी तय किया जाएगा कि आंदोलन में किस दिन कौन-कौन से संत शामिल होंगे, आंदोलन का स्वरूप क्या होगा और यह कितने समय तक जारी रखा जाएगा। इसके अलावा आंदोलन में भाग लेने वाले संतों, श्रद्धालुओं और कार्यकर्ताओं के लिए भोजन, आवास और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर भी चर्चा की जाएगी। बताया गया है कि आंदोलन के दौरान भोजन और अन्य व्यवस्थाएं जनसहयोग से संचालित की जाएंगी।
इस आंदोलन में केवल भिण्ड जिले के संत ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों से भी संत समाज के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। जानकारी के अनुसार ग्वालियर, मुरैना तथा उत्तरप्रदेश के इटावा और जालौन जिलों के कई संत, महंत और मठाधीश भी इस आंदोलन में भाग ले सकते हैं। संत समाज का कहना है कि यह आंदोलन केवल धार्मिक समुदाय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्र के आम नागरिक भी इसमें शामिल होकर सड़क चौड़ीकरण की मांग को समर्थन देंगे।
इस आंदोलन का नेतृत्व संत समिति के अध्यक्ष कालीदास महाराज कर रहे हैं। वे पिछले लगभग दो वर्षों से राष्ट्रीय राजमार्ग 719 के चौड़ीकरण की मांग को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे हैं। इससे पहले संत समाज ने भिण्ड के खंडा रोड पर दस दिवसीय आंदोलन भी किया था, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए थे।
इसके बाद जुलाई माह में संत समाज के प्रतिनिधि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात करने दिल्ली भी पहुंचे थे। उस समय केंद्रीय मंत्री की ओर से छह माह के भीतर सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया शुरू कराने का आश्वासन दिया गया था।
इसके बावजूद जब तय समय के भीतर काम शुरू नहीं हुआ तो संत समाज ने 29 दिसंबर को मालनपुर टोल प्लाजा पर सांकेतिक टोल बंद कराकर विरोध प्रदर्शन किया था। उस समय प्रशासनिक अधिकारियों ने संत समाज को आश्वासन दिया था कि जल्द ही सड़क चौड़ीकरण के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार कर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हालांकि अब तक इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं होने से संत समाज और स्थानीय नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
संत समाज का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के इस हिस्से पर सड़क संकरी होने के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं, जिनमें कई निर्दोष लोगों की जान भी जा चुकी है। इसलिए सड़क का शीघ्र चौड़ीकरण क्षेत्र की सुरक्षा और विकास दोनों के लिए आवश्यक है।
उधर संत समाज के आंदोलन को देखते हुए सरकार भी सक्रिय हो गई है। प्रदेश के नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने संत समाज से संपर्क साधते हुए उनसे आंदोलन शुरू करने से पहले बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है। मंत्री ने दंदरौआ धाम के महंत महामंडलेश्वर रामदास महाराज से भी इस संबंध में चर्चा की है।
बताया गया है कि मंत्री ने संतों को आश्वस्त किया है कि 14 मार्च को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ एक बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें संत समाज के प्रतिनिधियों को भी बुलाया जाएगा। इस बैठक में सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया को लेकर विस्तृत चर्चा कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
हालांकि संत समाज का कहना है कि यदि इस बैठक में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो 16 मार्च से मालनपुर टोल प्लाजा पर 'नो रोड-नो टोल' आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा और यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सड़क चौड़ीकरण को लेकर स्पष्ट और ठोस कार्रवाई शुरू नहीं हो जाती।
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