नयी दिल्ली , अप्रैल 08 -- भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे खाली पड़ी जमीनों पर औषधीय वृक्षारोपण के लिए ''आरोग्य वन'' परियोजना शुरू करने का निर्णय लिया है।

इस पहल का उद्देश्य जैव विविधता को बढ़ावा देना और सड़क अवसंरचना में पारिस्थितिक स्थिरता को शामिल करना है।

यह आधिकारिक जानकारी मंत्रालय ने बुधवार को जारी की। 'आरोग्य वन' परियोजना के जरिए एनएचएआई हरित गलियारों का एक नेटवर्क विकसित किया जाएगा जो पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ स्वास्थ्य और पारंपरिक ज्ञान के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगा।

एनएचएआई के अनुसार परियोजना के पहले चरण में 62.8 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले 17 भूखंडों पर लगभग 67,462 औषधीय पेड़ लगाए जाएंगे। यह कार्य मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, राजस्थान, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे किया जाएगा।

परियोजना के तहत नीम, आंवला, इमली, जामुन, नींबू, गूलर और मौलसरी समेत करीब 36 औषधीय वृक्ष प्रजातियों की पहचान की गई है। इन्हें संबंधित क्षेत्रों की जलवायु और मिट्टी के अनुसार लगाया जाएगा, ताकि इनके बेहतर विकास और संरक्षण को सुनिश्चित किया जा सके। एनएचएआई ने बताया कि टोल प्लाजा, सड़क किनारे सुविधाओं, इंटरचेंज और प्रमुख जंक्शनों के पास स्थित भूमि को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे आम लोगों में जागरूकता बढ़े और इन स्थलों का उपयोग ज्ञान केंद्र के रूप में भी किया जा सके।

प्राधिकरण ने आगामी मानसून में वृक्षारोपण के लिए करीब 188 हेक्टेयर भूमि की पहचान की है। इससे पौधों के जीवित रहने की दर बढ़ाने और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। यह पहल आयुर्वेद जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को प्रोत्साहित करने और देशी औषधीय पौधों के संरक्षण की दिशा में भी अहम कदम मानी जा रही है। 'आरोग्य वन' को ऐसे जीवंत भंडार के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां लोगों को औषधीय पौधों और उनके उपयोग के बारे में जानकारी मिल सके।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित