नयी दिल्ली , फरवरी 17 -- भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे परागणकारी या मधुमक्खी गलियारे विकसित करने की एक अनूठी पहल शुरु करने की घोषणा की है।

आधिकारिक सूचना में कहा गया है कि एनएचएआई ने सतत अवसंरचना विकास की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे सजावटी वृक्षारोपण में बदलाव करते हुए पारिस्थितिक वृक्षारोपण को महत्व दिया है और इसके तहत 'मधुमक्खी गलियारे' में मधुमक्खी-अनुकूल वनस्पतियों का रोपण करने की योजना बनाई है जिसमें फूलों के पेड़ और पौधे शामिल होंगे। इनमें ऐसे वृक्षों को महत्व दिया जाएगा जिनसे पूरे साल मकरंद और पराग की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।

सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे वृक्षारोपण परागणकारी संरक्षण में सहयोग करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। यह पहल मधुमक्खियों और अन्य परागणकारी जीवों पर बढ़ते पारिस्थितिक तनाव को कम करने में मदद करेंगी जो परागण सेवाओं, कृषि और बागवानी उत्पादकता और समग्र पारिस्थितिक संतुलन को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रहा है।

राष्ट्रीय राजमार्गों को सजाने के लिए वृक्षारोपण गतिविधियों को समर्पित परागणकारी या 'मधुमक्खी गलियारा' बनाने की एनएचएआई की यह अनूठी पहल है जिसमें वृक्षों, झाड़ियों, जड़ी-बूटियों और घासों का मिश्रण शामिल होगा और यह मकरंद और पराग से भरपूर प्रजातियों को लगाकर जंगली तत्वों को संरक्षित करेगा। पौधों की प्रजातियों का चयन इस प्रकार से किया जाएगा कि विभिन्न ऋतुओं में फूलों का खिलना अलग-अलग समय पर हो, जिससे पूरे वर्ष लगभग निरंतर फूल खिलने का चक्र बना रहे। राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे नीम, करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश, जामुन और शिरीष सहित देशी प्रजातियों के पेड़ और पौधे लगाए जाएंगे।

सूत्रों ने कहा है कि कृषि-जलवायु परिस्थितियों और स्थानीय उपयुक्तता के आधार पर राष्ट्रीय राजमार्गों और एनएचएआई के अन्य खाली भूखंडों पर भी इस तरह के गलियारे विकसित किए जाएंगे। एनएचएआई के क्षेत्रीय कार्यालय उन राष्ट्रीय राजमार्ग के खंडों की पहचान करेंगे, जहां लगभग 500 मीटर से एक किलोमीटर के अंतराल पर फूलों वाले पेड़ों के ऐसे समूह लगाए जा सकेंगे, जो मधुमक्खियों और जंगली मधुमक्खियों की औसत चारा खोजने की दूरी के अनुरूप है। एनएचएआई के क्षेत्रीय कार्यालय 2026-27 के दौरान कम से कम तीन परागणकारी गलियारों विकसित करेंगे। एनएचएआई का लक्ष्य 2026-27 के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे लगभग 40 लाख पेड़ लगाने का है, जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत वृक्ष 'मधुमक्खी गलियारा' पहल के अंतर्गत लगाए जाएंगे।

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