, Dec. 17 -- पंडित बिस्मिल ने देशवासियों के नाम संदेश का पर्चा छपवाया और उसे उत्तर प्रदेश के 48 जिलों में एक साथ बंटवाया। यह पर्चा पंडित गेंदा लाल दीक्षित की ग्वालियर में गिरफतारी के प्रतिशोध में छपवाया गया था। रातों रात पूरे प्रदेश में एक साथ पर्चे बटने से अंग्रेज हुकूमत ने इसे बडी चुनौती माना और इस पर्चे तथा पुस्तक अमरीका को आजादी कैसे मिली दोनो को सरकार ने जब्त कर लिया। यहीं से पंडित बिस्मिल का क्रान्तिकारी नेतृत्व उभरा और पूरे भारत में इन्होंने सशस्त्र क्रांतिकारी संगठन का नाम हिन्दूस्तान रिपलिकन एशोसिएशन था। इस दल ने पूरे उत्तर भारत में अपना विस्तार प्रारम्भ किया।
मैनपुरी षडयंत्र बिस्मिल पर भी वारंट निकल गया। वारंट निकलने की खबर बिस्मिल को मिल गयी औार वह तत्काल फरार हो गये। इसी बीच मन की लहर नाम से कविताओं का संग्रह उन्होने प्रकाशित किया जिसकी प्रतियों को अंग्रेजी शासन ने जब्त कर लिया। अपने फरारी के जीवन में बिस्मिल का मुख्य क्षेत्र आगरा के आस पास रहा।
बिस्मिल ने इस वक्त अपना नाम बदल कर रूप सिंह रख लिया था। रूप और राम नाम से इनहोंने तमाम पत्र पत्रिकाओं में लेख छपवाये। रूप नाम से इन्होंने एक छोटे सरकारी अस्पताल के डाक्टर के छुट्टी पर जाने पर उसकी जगह चिकित्सक का कार्य भी किया। इसी फरारी की अवस्था में अपने छोटे भाई सुशील के नाम से ..सूशील ग्रन्थ माला..भी शंुरू किया और छह पुस्तके मन कीलहरए बोलसेविकों की करतूतए केथोराइन स्वदेशी रंग और दो बंगला से अनुवादितकर प्रकाशित किया।
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