, Dec. 17 -- देश के राजनैतिक हालात को जानने के लिए बिस्मिल बराबर अखबार पढा करते थे और तमाम नवजवान इनसे इतने प्रभावित रहे कि इनहें वे सदैव चारो तरफ से घेरे रहते थे। अपने क्रान्तिकारी विचारों के प्रतिपादन के लिए इस दल को धन की बड़ी जरुरत थी क्योंकि मां भारती को अंग्रेजों के खूनी पंजे से छुडाने के लिए इन्हें कोई चन्दा भी नहीं देता था इसीलिए इस दल के लोग अंग्रेंज हुकूमत के सहयोगियों और प्रशंसकों को लूटकर अपने उद्देश्यों की पूर्ति करते थें लेकिन बाद में बिस्मिल ने देशवासियों की जगह सरकारी खजानों को ही छीनने का लक्ष्य बनाया और सरकार के छीने धन से हथियार,गोला, बारूद और अन्य आवश्यकशस्त्र खरीदे जाने लगे।
पंडित बिस्मिल के नेतृत्व में क्रानितकारियों का दल 9 अगसत 1925 को 8 डाउन सराहनपुर, लखनउ सवारी गाडी पर सवार हुए। चूंकि तीसरे दर्जे की जंजीर अक्सर खराब रहती थी इस वास्ते सेकेन्ड क्लास के डिब्बे जंजीर खींचने के लिए उस डिब्बे में अशफाकुलला खां वारसी,राजेन्द्र नाथ लाहिडी और शचीन्द्र नाथ एक साथ ट्रेन पर बैठे। तीसरे दर्जे के डिब्बे में पंडित राम प्रसाद बिस्मिल केशव चक्रवर्ती, मुरारी लालए मुकुन्दी लाल, चन्द्रशेखर आजाद, बनवारी लाल और मन्मथ नाथ गुप्त सवार हुए। बिस्मिल ने अपने सभी साथियों को काम बांट दिया। दूसरे दर्जें के लोंगों को जंजीर खींचकर गाडी खडी होने के बाद अन्य सहयोगियों को गार्ड को पकड लेने और खजाने वाले बाक्स को कब्जे में ले लेने का कार्य सौंप दिया गया।
सन्ध्या के समय काकोरी रेलवे स्टेशन से आगे तार के 8वें खम्भे के पास गाडी खडी कर दी गयी। गार्ड के ड्राइबर का बुरा हाल था। बकसा नीचे गिरा दिया गया। लाइन के दोनो ओर दो दो आदमी माउजर पिस्तौल लिए खडे किये गये थे। माउजर पर कुन्दे चढाकर राइफल की शक्ल बना दिया गया था। इस गाडी में कुछ अंग्रेज फौजी भी थेंक्रान्तिकारियों ने एलान कर दिया था कि हम किसी मुसाफिर को नहीं लूटेंगे। केवल सरकारी खजाना ही लेने का हम लोंगों का लक्ष्य है जो जहां है वही रहे, हिले डूले नहीं। बिस्मिल ने सुरक्षा का भार अनुभवी लोंगों को सौंप रखा था जिन्हे यह हिदायत दी गयी कि गाडी के समानानतर हवा में गोलियां थोड़ी देर बाद दागते रहे जब तक कोई मुकाबले में न आवे गोली न मारी जाय। बिस्मिल नेअंग्रेजी खजाना के इस लूट को नर हत्या करा कर भयानक रूप नहीं देना चाहते थे लेकिन एक सज्जन ने जिनका काम गोली चलाना नहीं था माउजर चला दिया जो एक यात्री को लग गया। क्रान्तिकारियों ने रूपयों को चादर में बांधा और आ गये। रास्ते में किसी ने भी रोका टोका नही और इस घटना से चारो तरफ सनसनी फैल गयी।
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