पटना , अप्रैल 01 -- राष्ट्रीय जूट बोर्ड एवं जूट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के स्थापना दिवस के अवसर पर बुधवार को भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल एवं केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर उद्योग मंत्री डॉ. जायसवाल ने कहा कि जूट उद्योग भारत की पारंपरिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा होने के साथ-साथ आज के समय में सतत विकास का एक सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से 'लखपति दीदियों' की सराहना करते हुए कहा कि ये महिलाएं न केवल जूट आधारित उत्पादों के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की मिसाल भी प्रस्तुत कर रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान जूट उद्योग में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 'लखपति दीदियों' को सम्मानित किया गया, जिससे उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। यह सम्मान न केवल उनके कार्य का मूल्यांकन है, बल्कि अन्य महिलाओं को भी इस क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रेरित करेगा।

समारोह में राष्ट्रीय जूट बोर्ड एवं जूट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की ओर से संयुक्त रूप से प्रकाशित एक विशेष पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया। इस पुस्तक में जूट उद्योग की वर्तमान स्थिति, संभावनाएं, नवाचार तथा इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों को विस्तार से दर्शाया गया है।

इसके अतिरिक्त, ज्ञान भवन परिसर में जूट से निर्मित विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें हैंडबैग, होम डेकोर आइटम, कैरी बैग, फर्निशिंग सामग्री सहित अनेक आकर्षक एवं उपयोगी उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। माननीय अतिथियों ने इन स्टॉलों का अवलोकन करते हुए जूट उत्पादों की गुणवत्ता, डिज़ाइन और नवाचार की सराहना की।

इस अवसर पर वस्त्र मंत्रालय की विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) श्रीमती अमृत राज, संयुक्त सचिव श्रीमती पद्मिनी सिंगला, राष्ट्रीय जूट बोर्ड के सचिव शशि भूषण सिंह, जूट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संजय कुमार पाणीग्राही सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

समारोह का उद्देश्य जूट उद्योग को नई पहचान देना, इसके उपयोग को प्रोत्साहित करना तथा स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को एक मंच प्रदान करना रहा। यह आयोजन न केवल जूट क्षेत्र में नवाचार और निवेश को बढ़ावा देने में सहायक होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास के लक्ष्यों को भी मजबूती प्रदान करेगा।

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