चेन्नई , फरवरी 12 -- केन्द्र सरकार की कथित श्रमिक-विरोधी नीतियों के खिलाफ 12 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल के बावजूद तमिलनाडु में जनजीवन सामान्य बना रहा। राज्यभर में बस सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हुईं और सरकारी विभागों तथा उपक्रमों में कामकाज प्रभावित नहीं हुआ।

तमिलनाडु सरकार ने राज्य कर्मचारियों को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि जो कर्मचारी ड्यूटी पर उपस्थित नहीं होंगे, उन्हें उस दिन का वेतन नहीं मिलेगा और उनकी अनुपस्थिति को अधिकृत अवकाश नहीं माना जाएगा।

सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और उसके सहयोगी दलों ने हड़ताल को समर्थन देने की घोषणा की है। माकपा से संबद्ध सीटू, आईएनटीयूसी सहित विभिन्न ट्रेड यूनियनों ने कांचीपुरम और तूतीकोरिन सहित कुछ जिलों में रेल रोको जैसे प्रदर्शन किए और केंद्र सरकार की नीतियों की निंदा करते हुए हाल में लागू चार श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग की।

रिपोर्टों के अनुसार, बिजली, बीमा, परिवहन समेत प्रमुख क्षेत्रों के करीब 30 करोड़ कर्मचारी देशभर में इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे हैं। हड़ताल के मद्देनजर तमिलनाडु राज्य परिवहन निगम (टीएनएसटीसी) के कर्मचारियों को अवकाश की अनुमति नहीं दी गई है और सभी कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से ड्यूटी पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। परिवहन विभाग ने आदेशों की अवहेलना करने वालों के वेतन में कटौती की चेतावनी भी जारी की है।

अधिकारियों ने बताया कि राज्यभर में सार्वजनिक परिवहन सेवाएं सामान्य हैं। चेन्नई में महानगर परिवहन निगम (एमटीसी) की बस सेवाएं सुबह से ही सामान्य रूप से चल रही हैं। ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और अन्य परिवहन साधन भी सामान्य रूप से संचालित हुए। बाजार, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और शैक्षणिक संस्थान भी खुले रहे।

रिपोर्टों के अनुसार, कुछ राज्यों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, सरकारी कार्यालय, बाजार और परिवहन सेवाएं हड़ताल के कारण प्रभावित हुई हैं। इस हड़ताल में भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस), भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (आईएनटीयूसी), अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी), हिंद मजदूर सभा (एचएमएस), सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू), ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी), ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर (टीयूसीसी), सेल्फ एम्प्लॉयड वीमेन्स एसोसिएशन (सेवा), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (एआईसीसीटीयू), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (एलपीएफ), यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (यूटीयूसी) और नेशनल फ्रंट ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स-धनबाद (एनएफआईटीयू-डीएचएन) शामिल हैं।

ट्रेड यूनियनों का कहना है कि चार नयी श्रम संहिताएं श्रमिक अधिकारों को कमजोर करती हैं, रोजगार सुरक्षा घटाती हैं और नियोक्ताओं को नियुक्ति और छंटनी में अधिक छूट देती हैं। यूनियनों ने सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण, वेतन संरक्षण समेत अन्य मुद्दों पर भी आपत्ति जताई है।

इस बीच, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) ने बुधवार शाम राज्यभर में विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। तमिलनाडु कांग्रेस के अध्यक्ष के. सेल्वापेरुंथगई ने कहा कि वह चेन्नई में प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से इसमें भाग लेने की अपील की।

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