कोलकाता , मार्च 07 -- अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम और बंगाल दौरे को लेकर उठे विवाद पर सफाई देते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि राष्ट्रपति भाजपा के राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बन गयी हैं और केंद्र में सत्ताधारी दल के 'जाल' में फंस गयी हैं। उन्होंने केंद्र पर हमला करते हुए यह भी कहा कि केवल बंगाल को निशाना बनाया जाता है।

सुश्री बनर्जी की यह प्रतिक्रिया राष्ट्रपति मुर्मू की उस टिप्पणी के बाद आयी है, जिसमें उन्होंने इस बात पर निराशा व्यक्त की थी कि उनके उत्तर बंगाल दौरे के दौरान न तो मुख्यमंत्री और न ही राज्य का कोई मंत्री उनके स्वागत के लिए आया।

एस्प्लेनेड के डोरिना क्रॉसिंग पर आयोजित रैली में मुख्यमंत्री ने कहा, "आज भाजपा संविधान को ऐसी जगह ले गयी है कि हमें यह कहते हुए शर्म आती है। हम माननीय राष्ट्रपति का सम्मान करते हैं, लेकिन उन्हें 'राजनीति बेचने' के लिए भेजा गया है। उनके माध्यम से भाजपा का एजेंडा भेजा गया है। मुझे खेद है, मैडम। मेरे मन में आपके प्रति पर्याप्त सम्मान है, लेकिन आप भाजपा के जाल में फंस गयी हैं।"मुख्यमंत्री की यह प्रतिक्रिया राष्ट्रपति मुर्मू के उत्तर बंगाल के बिधाननगर में 'अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन' को संबोधित करने के दौरान दिये गये बयान के बाद आयी। राष्ट्रपति ने इस बात पर निराशा जतायी थी कि सुश्री बनर्जी या राज्य का कोई भी मंत्री उनके स्वागत के लिए नहीं पहुंचा।राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि यह कार्यक्रम बिधाननगर में आयोजित किया जा सकता था, जहां पर्याप्त जगह थी और बड़ी संख्या में लोग जुट सकते थे। उन्होंने हालांकि आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन ने वहां कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी।

राष्ट्रपति ने कहा, "वहां काफी जगह थी और बहुत अधिक लोग शामिल हो सकते थे। लेकिन मुझे नहीं पता कि राज्य प्रशासन ने वहां बैठक की अनुमति क्यों नहीं दी? आज का कार्यक्रम ऐसी जगह पर हो रहा है, जहां लोगों का आना मुश्किल है। शायद राज्य सरकार नहीं चाहती कि आदिवासी समुदाय बड़ी संख्या में इकट्ठा हो।"राष्ट्रपति मुर्मू ने आगे कहा, "सुश्री ममता बनर्जी मेरी छोटी बहन जैसी हैं। मैं भी बंगाल की बेटी हूं और मुझे इस राज्य के लोगों से प्यार है। शायद सुश्री ममता नाराज हो गयीं, इसलिए वे खुद मेरा स्वागत करने नहीं आयीं, न ही कोई मंत्री आया। हालांकि यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। मैं आप सभी की कुशलता की कामना करती हूं।"मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हालांकि ने इन आरोपों का कड़ा प्रतिकार किया और इस अपेक्षा पर सवाल उठाया कि राज्य नेतृत्व को हमेशा ऐसे दौरों में शामिल होना चाहिए।

सुश्री बनर्जी ने कहा, "हम पर लोगों को आने की अनुमति न देने का आरोप लगाया जा रहा है। यह राज्य सरकार का कार्यक्रम नहीं था। राज्य सरकार को तो इसके बारे में पता तक नहीं था।"उन्होंने आगे कहा, "हां, हमें सूचना मिलती है कि राष्ट्रपति कब आयेंगी और कब जायेंगी और हम उसी के अनुसार प्रयास करते हैं। लेकिन अगर कोई रोज आता है, तो क्या हमें हर बार जाना होगा? क्या हमारे पास काम नहीं है? क्या हमें हर समय आपके पीछे-पीछे चलना होगा? अगर आप साल में एक बार आयेंगी तो मैं खुद जाकर आपका स्वागत करूंगी। लेकिन अगर कोई साल में 50 बार आता है, तो क्या मेरे पास इतना समय है?"यह विवाद शनिवार को सिलीगुड़ी में मुर्मू के शामिल हुए एक आदिवासी सम्मेलन को लेकर शुरू हुआ। राष्ट्रपति को आदिवासी समुदायों के एक वार्षिक सम्मेलन में आमंत्रित किया गया था। इसकी योजना मूल रूप से सिलीगुड़ी के बिधाननगर में बनायी गयी थी।देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति के दौरे से जुड़ी सुरक्षा और लॉजिस्टिक संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए आयोजन स्थल को बागडोगरा हवाई अड्डे के पास गोसाईपुर में स्थानांतरित कर दिया गया था।

जब श्रीमती मुर्मू दोपहर में वहां पहुंचीं, तो वहां केवल मुट्ठी भर लोग ही मौजूद थे। हवाई अड्डे पर उनकी आगवानी के लिए एकमात्र वरिष्ठ स्थानीय प्रतिनिधि के रूप में सिलीगुड़ी के महापौर गौतम देब ही उपस्थित थे।

प्रोटोकॉल के अनुसार, ऐसे दौरों के दौरान मुख्यमंत्री या राज्य सरकार के किसी प्रतिनिधि, आमतौर पर मंत्री से राष्ट्रपति की आगवानी की अपेक्षा की जाती है।

इस मामले में प्रोटोकॉल का आंशिक रूप से उल्लंघन हुआ, जिससे राष्ट्रपति भवन में असंतोष पैदा हुआ। गोसाईपुर का कार्यक्रम पूरा करने के बाद श्रीमती मुर्मू बिधाननगर पहुंचीं, जहां आदिवासियों का बड़ा जमावड़ा लगा हुआ था।

वहां उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने राज्य प्रशासन के खिलाफ कई तीखी टिप्पणियां कीं और सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री या और कोई मंत्री उनके स्वागत के लिए क्यों नहीं आया?बाद में सुश्री बनर्जी ने कहा कि वह इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकीं, क्योंकि वह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर धरने पर बैठी थीं।

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