इंफाल , दिसंबर 12 -- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को मणिपुर के इंफाल में नुपी लाल स्मारक परिसर में नुपी लाल (महिला युद्ध) दिवस के अवसर पर राज्य के स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की और सेनापति जिले का दौरा किया।
राष्ट्रपति ने सेनापति जिले में एक समारोह को संबोधित करते हुए कहा, "आज पूरा देश नुपी लाल स्मृति दिवस मना रहा है। नुपी लाल सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन लाने में महिलाओं की शक्ति का एक उदाहरण हैं।"उन्होंने आगे कहा कि यह परिसर मणिपुरी महिलाओं के बलिदानों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है और उनके साहस की याद दिलाता है जिनमें उन्होंने ब्रिटिश और सामंती शक्तियों को बड़े साहस के साथ चुनौती दी थी।
पहला नुपी लाल आंदोलन 1904 में हुआ था जब अंग्रेजों ने मणिपुर में जबरन श्रम की एक प्रथा, लल्लुप प्रणाली को फिर से लागू करने की कोशिश की थी। मणिपुरी महिलाओं के नेतृत्व में हुए जन विद्रोह ने अंग्रेजों को अपना निर्णय वापस लेने के लिए मजबूर कर दिया।
दूसरा नुपी लाल आंदोलन 1939 में हुआ जो राज्य से चावल निर्यात करने के औपनिवेशिक ब्रिटिश के प्रयासों का परिणाम था। मणिपुरी महिलाओं ने एक जन संघर्ष का नेतृत्व किया जिसमें उन्होंने सैनिकों की यातनाओं और गोलियों का निहत्थे होकर सामना किया।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि सेनापति जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध संस्कृति एवं गौरवशाली जनजातीय विरासत के लिए प्रसिद्ध है। उन्होंने आगे कहा कि मणिपुर में समृद्ध सांस्कृतिक विविधता है जिसमें बड़ी संख्या में जनजातीय समुदाय हैं और यह विविधता सेनापति जिले में भी परिलक्षित होती है।
उन्होंने कहा कि वह ताफौ नागा गांव में आयोजित एक स्वागत समारोह में शामिल हुईं, जहां सेनापति जिले के जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधियों ने उनका हार्दिक स्वागत किया। मैराम जनजाति को विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूह (पीवीटीजी) के रूप में मान्यता प्राप्त है और यह मणिपुर का एकमात्र पीवीटीजी है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित