जमशेदपुर , दिसंबर 29 -- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी), जमशेदपुर के 15वें दीक्षांत समारोह में आज शामिल हुईं।

श्रीमती मुर्मू ने इस मौके पर छात्रों को देश के प्रति उनकी जिम्मेदारियों का बोध कराया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। समारोह के दौरान एक रोचक और प्रेरक क्षण तब आया, जब गोल्ड मेडल पाने वाले छात्रों के सम्मान में तालियां नहीं बजीं। इस पर राष्ट्रपति की सहज टिप्पणी ने पूरे सभागार को तालियों की गड़गड़ाहट से भर दिया।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू ने कहा कि साल भर के संघर्ष, परिश्रम और अनिद्रा के बाद दो छात्रों को गोल्ड मेडल मिला, लेकिन ताली नहीं बजी। उन्हें लगा कि शायद छात्रों को ताली बजाने से मना किया गया है या वे थक गए हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा-"कहते हैं, देना है तो लेना है। आपने ताली नहीं बजाई, तो आपके समय पर कौन ताली बजाएगा?" राष्ट्रपति के इस कथन ने माहौल को उत्साह से भर दिया और पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा।

राष्ट्रपति ने इनोवेशन और स्टार्ट-अप संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तकनीकी बदलाव अभूतपूर्व हैं, जिससे नए अवसरों के साथ-साथ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। साइबर अपराध और ई-वेस्ट जैसी समस्याओं की ओर इशारा करते हुए उन्होंने छात्रों से अपेक्षा की कि वे आधुनिक तकनीक के दुष्प्रभावों के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाएं।

श्रीमती मुर्मू ने कहा कि सस्टेनेबल एनर्जी डेवलपमेंट और वेस्ट मैनेजमेंट के लिए इंजीनियर तकनीक विकसित कर सकते हैं, लेकिन इसे सामाजिक और आर्थिक रूप से व्यवहारिक बनाने में अर्थशास्त्रियों और उद्योगपतियों की अहम भूमिका होती है। उन्होंने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की चर्चा करते हुए कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों की प्रतिष्ठा केवल रैंकिंग या प्लेसमेंट से नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र में उनके विद्यार्थियों के योगदान से तय होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि विकसित भारत का सपना केवल ऊंची इमारतों या मजबूत अर्थव्यवस्था से नहीं, बल्कि समान अवसर और गरिमापूर्ण जीवन वाले समाज के निर्माण से साकार होगा। बिना करुणा के किया गया आविष्कार केवल मशीन बनाता है, जबकि करुणा से प्रेरित नवाचार समाज के लिए वरदान सिद्ध होता है।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने गोविंद देव गिरि महाराज को डॉक्टर ऑफ लिटरेचर की मानद उपाधि तथा आर.के. बेहरा को डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी की उपाधि प्रदान की। गोल्ड मेडल प्राप्त करने पर प्रियांशु राज और कृष्णाशीष मंडल को सम्मानित किया गया।

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उपाधि प्राप्त छात्रों को बधाई देते हुए जमशेदजी टाटा की दूरदर्शिता और दिवंगत रतन टाटा के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि एनआईटी जमशेदपुर से न केवल कुशल अभियंता, बल्कि राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी नागरिक तैयार होने चाहिए।

कार्यक्रम में मंत्री दीपक बिरुआ, सांसद, विधायक, एनआईटी बोर्ड ऑफ गवर्नेंस के अध्यक्ष सुनील अलख, निदेशक गौतम सूत्रधार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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