नयी दिल्ली , फरवरी 2 -- राज्य सभा के मनोनीत सदस्य सी सदानंद मास्टर ने 'राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव' पर मंगलवार को चर्चा का आरंभ करते इसे विकसित भारत की योजना का ऐसा वृहद मानचित्र बताया जिसमें देश की उपलब्धियां और आकांक्षाएं झलकती हैं।
सत्र के पहले दिन 28 जनवरी को दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के संबोधन पर विपक्षी दलों के विभिन्न सदस्यों की ओर इसमें संशोधन के लिए सभापति को 126 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। सत्तापक्ष के सदस्यों ने धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान विपक्ष की ओर से किये गये शोर शराबे की निंदा की।
श्री सदानंद मास्टर ने चर्चा की शुरूआत करते हुए कहा कि राष्ट्रपति का अभिभाषण विकसित भारत का एक वृहद खाका प्रस्तुत करता है और यह देश के लोगों की आकांक्षाओं का प्रतीक है। अंग्रेजी और मलयालम का मिला जुला प्रयोग करते हुए मनोनीत सदस्य का सदन में यह पहला वक्तव्य था। इस दौरान केरल की राजनीति हिंसा में 35 वर्ष पहले अपने दोनों पांव गंवा चुके इस सदस्य के दोनों कृत्रिम पांव के मेज पर रखे होने पर मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (माकपा) के जान ब्रिटास ने व्यवस्था का प्रश्न उठाया। उनके भाषण के दौरान विपक्ष के कुछ सदस्यों ने कई बार शोर किया।
मनोनीत सदस्य ने कहा कि राष्ट्रपति ने अपने भाषण में इक्कीसवीं सदी के पहले 35 वर्ष में विभिन्न सरकारों के नेतृत्व में भारत की उल्लेखनीय उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने देश की अब तक की उपलब्धियों के आधार पर आज़ादी के अमृतकाल में विकसित भारत के निर्माण का संकल्प और वृहद योजना का चित्रण किया है। उन्होंने इसी सदर्भ में राष्ट्रीय स्वयं संघ की सभाओं में पढ़े जाने वाले एक समवेत गान और मलयालम की एक कविता में मातृभूमि के बारे में की गयी संकल्पना का उदाहरण दिया और कहा कि हमारे वैदिक मंत्रों से लेकर इन गीतों में भी इसी तरह की कल्पना है। उन्होंने निर्धन की सेवा को ही प्रभु की सेवा बताने वाले स्वामी विवेकानंद (नरेंद्र) के वक्तव्य का उल्लेख किया और कहा, '' आज के हमारे नरेन्द्र (प्रधानमंत्री मोदी) भी इसी काम में लगे हैं।''श्री सदानंद मास्टर ने सबका साथ, सबका विकास के मोदी सरकार के नारे का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें ऐसा भारत बनाना है जहां सभी अपने को भारत माता की संतान समझें और सभी भातृ- भाव से रहें। उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण में देश की प्राचीन सांस्कृतिक विरासतों के उद्धार और संवर्धन का जिक्र करते हुए कहा , ''हर राष्ट्र के होने का एक उद्येश्य होता है, भारत के होने का उद्येश्य आध्यात्म है।" उन्होंने वंदेमातरम के 150 पूरे होने के समारोहों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले जहां 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' के नारे लगते थे वहां अब वंदेमातरम का घोष हो रहा है। श्रीनगर के लाल चौक पर जहां कभी पाकिस्तान का झंडा फहराया जाता था वहां तिरंगा लहरा रंहा है।' उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण को उद्धरित करते हुए कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य किसी एक दल या सरकार का नारा नहीं बल्कि एक निरंतर यात्रा है।
श्री सदानंद मास्टर ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में करोड़ों गरीबों के घरों में रसोई गैंस के सिलेंडर और नल से जल तथा अन्य क्षेत्रों में प्रगति का उल्लख किया गया है पर केरल की तस्वीर इससे अलग है। वहां अवसरों और सुविधाओं की कमी से युवा बाहर जाने को विवश है और यह राज्य ' ओल्ड एज होम' (वृद्धाश्रम) बन गया है। वहां हर साल साढे चार लाख युवा पढ़ाई के लिए बाहर चले जाते हैं , बहुत से घरों में केवल बूढ़े मां-बाप रह रहे हैं। इस पर माकपा के सदस्यों ने टोका-टाकी की।
प्रस्ताव का समर्थन करते हुए भाजपा की मेधा विश्राम कुलकर्णी ने संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति के संबोधन के दौरान विपक्ष के शोर-शराबे का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष का यह कृत्य निंदनीय है। विपक्ष राष्ट्रहित की गंभीरता को समझता ही नहीं।
श्रीमती कुलकर्णी ने कहा कि राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में 'राष्ट्र सर्वोपरि है' का आह्वान किया है। लोकतंत्र में मतभेद हो सकते हैं पर देश की सुरक्षा और विकास के लक्ष्यों को लेकर कोई मतभेद नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले 'गरीबी हटाओ' महज एक नारा था लेकिन वर्तमान सरकार ने अच्छी नीति और नीयत के साथ 25 करोड़ लोगों को गरीबी की रेखा से नीचे उठाया।
उप सभापति हरिवंश ने सदन को बताया कि अभिषाषण पर कुल 126 संशोधन के प्रस्ताव मिले हैं।
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