भोपाल , अप्रैल 10 -- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि रायसेन में 11 से 13 अप्रैल तक आयोजित होने वाला राष्ट्रीय 'उन्नत कृषि महोत्सव' खेती की सूरत बदलने की दिशा में एक बड़ा और ठोस कदम साबित होगा।
आज शुक्रवार को भोपाल में अपने सरकारी आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसानों की आय बढ़ाना और हर नागरिक तक पोषणयुक्त आहार पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का फोकस केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि संतुलित पोषण और कृषि विविधीकरण पर भी है।
श्री चौहान ने कहा कि देश में गेहूं और धान का पर्याप्त भंडार है, लेकिन दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता हासिल करना अभी चुनौती है। इसी दिशा में उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि छोटे जोत आकार की समस्या के समाधान के लिए समेकित कृषि प्रणाली (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें एक ही भूमि पर फसल, पशुपालन, मधुमक्खी पालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियां एक साथ की जा सकें। उन्होंने कहा कि अब "लैब टू लैंड" की अवधारणा के तहत वैज्ञानिक शोध को सीधे खेतों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि किसान नई तकनीकों का लाभ उठा सकें। इसके लिए क्षेत्रीय स्तर पर कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही हैं और वैज्ञानिकों की टीमें किसानों के बीच जाकर प्रशिक्षण देंगी।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि रायसेन में आयोजित इस महोत्सव का उद्घाटन राजनाथ सिंह और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे, जबकि समापन नितिन गडकरी द्वारा किया जाएगा। महोत्सव में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिकों सहित देशभर के विशेषज्ञ भाग लेंगे। महोत्सव के दौरान 20 तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन, एआई आधारित कृषि समाधान, मशीनीकरण, दलहन-तिलहन उत्पादन, बागवानी, प्राकृतिक खेती और समेकित कृषि जैसे विषय शामिल होंगे। प्रत्येक सत्र में विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुतीकरण के साथ किसानों के सवालों के जवाब भी दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि किसानों को व्यावहारिक जानकारी देने के लिए लाइव डेमोंस्ट्रेशन भी किए जाएंगे, जिनमें कृषि उपकरण, ड्रोन, माइक्रो इरिगेशन, ग्रीन हाउस, नर्सरी, मधुमक्खी पालन और पशुपालन के मॉडल शामिल हैं। इससे किसान नई तकनीकों को समझकर अपने खेतों में लागू कर सकेंगे।
श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष को 'कृषक कल्याण वर्ष' घोषित किया है और महोत्सव के दौरान विभिन्न जिलों के लिए कृषि रोडमैप भी प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें स्थानीय जलवायु और संसाधनों के अनुसार फसल और तकनीक की जानकारी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए इस वर्ष 18 लाख किसानों को जोड़ने और लगभग 8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को इसके अंतर्गत लाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही फर्टिलाइजर पर सब्सिडी जारी रखते हुए यूरिया और डीएपी की कीमतों को नियंत्रित रखा गया है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित