रायसेन , मार्च 25 -- मध्य प्रदेश के रायसेन जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर ग्राम परवरिया में स्थित मां हरसिद्धि का प्राचीन दरबार श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि यहां सैकड़ों वर्षों से मां अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करती आ रही हैं, जिसके कारण देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

मंदिर के पुजारी रोहित दीक्षित के अनुसार किवदंतियों में वर्णित है कि राजा विक्रमादित्य ने मां हरसिद्धि की कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर मां उनके साथ उज्जैन जाने को तैयार हो गई थीं। कहा जाता है कि उज्जैन जाते समय मां कुछ समय के लिए इसी स्थान पर रुकी थीं और उनके चरण यहां पड़े थे। तभी से इस स्थल पर मां के चरणों की पूजा की जाती है।

मान्यता के अनुसार मां के धड़ की पूजा भोपाल जिले के तरावली स्थित दरबार में तथा मुख की पूजा उज्जैन में की जाती है, जहां मां हरसिद्धि के रूप में विराजमान हैं। एक अन्य कथा के अनुसार जब राजा विक्रमादित्य मां को लेकर जा रहे थे, तब बैलगाड़ी की धुरी टूट जाने से मां के चरण भूमि पर पड़ गए थे, जिसके बाद से यह स्थान पूजनीय हो गया।

स्थानीय जनश्रुति के अनुसार मां के दरबार का प्रसाद ग्रहण करने वाला श्रद्धालु वर्ष में कम से कम एक बार यहां दर्शन के लिए अवश्य आता है। इसी आस्था के चलते वर्षभर यहां भक्तों का आवागमन बना रहता है।

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