रायपुर, 13 मार्च 2026 ( वार्ता ) छत्तीसगढ़ में रायपुर के औद्योगिक क्षेत्रों में सिलतरा और खमतराई क्षेत्र में संचालित कई फैक्ट्रियों में दबिश देकर सात नाबालिग किशोरों को मुक्त कराया।
पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि ये बच्चे अपनी उम्र के विपरीत भारी मशीनों और खतरनाक रसायनों के बीच काम करने को मजबूर थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार एसोसिएशन फॉर वॉलेंट्री एक्शन छत्तीसगढ़ को इन औद्योगिक क्षेत्रों में नाबालिगों से काम करवाए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों के आधार पर पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद संयुक्त टीम ने चार अलग-अलग कंपनियों और कारखानों में छापेमारी की।
कार्रवाई के दौरान उरला क्षेत्र से तीन और खमतराई इलाके से चार नाबालिग किशोरों को मुक्त कराया गया। जांच में सामने आया कि इन बच्चों से फैक्ट्री और बेकरी में वेल्डिंग, लोडिंग और पैकिंग जैसे कठिन कार्य कराए जा रहे थे।
छापेमारी के दौरान जिन संस्थानों में नाबालिगों से काम कराए जाने की पुष्टि हुई, उनमें सोनी प्लाईवुड इंडस्ट्री, शैमरॉक ओवरशिष प्राइवेट लिमिटेड, इद्राक्षी पाली प्लास्टर एलएलपी प्लांट और सन लॉजिस्टिक एंड डिस्ट्रीब्यूटर शामिल हैं।
पुलिस ने सोनी प्लाईवुड इंडस्ट्री के संचालक ईश्वर कुकरेजा और पिंटू, शैमरॉक ओवरशिष प्राइवेट लिमिटेड के ठेकेदार नूर इस्लाम और सरीफ, इद्राक्षी पाली प्लास्टर एलएलपी प्लांट के संचालक राजीव गाडिया तथा सन लॉजिस्टिक एंड डिस्ट्रीब्यूटर के संचालक नीसु सिंह और ठेकेदार सतीश कुमार सोनी के खिलाफ बाल श्रम निषेध अधिनियम सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है।
मुक्त कराये गये सभी नाबालिगों का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उन्हें बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। फिलहाल बच्चों को सुरक्षित बाल गृह भेजा गया है, जहां उनकी काउंसलिंग की जा रही है और उनके परिवारों से संपर्क स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है।
गौरतलब है कि रायपुर में बाल श्रम का यह पहला मामला नहीं है। करीब पांच महीने पहले खरोरा क्षेत्र की एक मशरूम फैक्ट्री में भी बड़ी कार्रवाई करते हुए 109 बाल मजदूरों को मुक्त कराया गया था। उस मामले में मानवाधिकार आयोग की टीम, महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस ने संयुक्त रूप से छापेमारी की थी। अधिकारियों का कहना है कि राजधानी को बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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