रायगढ़ , अप्रैल 27 -- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में ग्रीष्मकालीन अवधि के दौरान बोरवेल खनन पर लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में बोरवेल व्यवसायियों ने सोमवार को जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर प्रतिबंध हटाने की मांग की।

व्यवसायियों ने बताया कि शासन के इस निर्णय से उनका कारोबार पूरी तरह प्रभावित हो गया है और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। अधिकांश बोरवेल संचालकों ने मशीनें बैंक ऋण पर खरीदी हैं लेकिन काम बंद होने के कारण वे समय पर किस्त जमा नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त ब्याज का बोझ बढ़ता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक मशीन पर पांच से छह मजदूर कार्यरत रहते हैं, जिनका रोजगार भी प्रतिबंध के चलते ठप हो गया है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि ग्रीष्मकाल में ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गहराने लगता है, ऐसे में बोरवेल खनन पर रोक से आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

व्यवसायियों के अनुसार, किसानों को भी सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जिससे उनकी फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उनका कहना है कि यदि प्रतिबंध हटाया जाता है, तो न केवल उनके रोजगार को राहत मिलेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट से जूझ रहे लोगों और किसानों को भी सीधा लाभ मिलेगा।

व्यवसायियों ने जिला प्रशासन से वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बोरवेल खनन पर लगे प्रतिबंध को शीघ्र हटाने की मांग की है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए सकारात्मक निर्णय करेगा।

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