पटना , दिसम्बर 28 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)के प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक प्रेम रंजन पटेल ने रविवार को कहा कि कांग्रेस ने गांधी के नाम का उपयोग केवल सत्ता और परिवारवाद की राजनीति के लिए किया, उनके आदर्श,सत्य, त्याग और सेवा से उसका कोई लेना-देना नहीं है।

श्री पटेल ने आज बयान जारी कर कहा कि कांग्रेस का दोहरा चरित्र है और एक तरफ जहाँ उसे राम के नाम से परहेज है, वहीं दूसरी तरफ गांधी के नाम का दुरुपयोग वह राजनीतिक लाभ के लिए करती हैभाजपा के प्रवक्ता ने कहा कि देश आज स्पष्ट दिशा में आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत गारंटी रोजगार योजना के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार करोड़ों युवाओं, श्रमिकों और ग्रामीण परिवारों को सम्मानजनक रोजगार, कौशल और आत्मनिर्भरता से जोड़ने के संकल्प के साथ आगे बढ़ी है, लेकिन कांग्रेस इस योजना का विरोध कर यह साबित करना चाहती है कि उसे देश की बहुत चिंता है, जबकि सच्चाई यह है कि उसे इसमें केवल अपना राजनीतिक स्वार्थ दिखाई दे रहा है।

श्री पटेल ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा रोजगार देने वाली नीतियों का विरोध किया है। जब-जब देश को मजबूत करने वाली योजनाएँ सरकार की तरफ से लाई गईं , कांग्रेस ने उसके बारे में या तो भ्रम फैलाया या बाधा डालने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत गारंटी रोजगार योजना से कांग्रेस डरी हुई है, क्योंकि यह योजना जनता को सशक्त करती है और उनकी खोखली राजनीति को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि इसका विरोध कांग्रेस को आने वाले समय में राजनीतिक रूप से भारी पड़ेगा।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि ऐसा लगता है, कांग्रेस को राम के नाम से परहेज है और यह देश की सांस्कृतिक चेतना के प्रति उसकी नकारात्मक सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि राम भारत की आत्मा हैं, संस्कृति के प्रतीक हैं, मर्यादा और राष्ट्रबोध के आधार हैं, लेकिन कांग्रेस ने हमेशा राम को राजनीति की नजर से देखा और आस्था का सम्मान करने के बजाय उसका उपहास किया। इसे देश की जनता कभी नहीं भूलेगी।

श्री पटेल ने कहा कि गांधी का सरनेम लेकर गांधी को बदनाम करना कांग्रेस की सबसे बड़ी नैतिक विफलता है। महात्मा गांधी के नाम का उपयोग केवल सत्ता और परिवारवाद की राजनीति के लिए किया गया, जबकि उनके आदर्श,सत्य, त्याग और सेवा से कांग्रेस का कोई लेना-देना नहीं रहा है। गांधी का नाम उनके लिए केवल एक राजनीतिक ढाल है। सही मायने में उनके आचरण में गांधी कहीं नजर नहीं आते हैं।

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