नैनीताल , दिसंबर 23 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कार्बेट नगरी रामनगर के पापड़ी गांव में स्टोन क्रेशर के निर्माण पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश के साथ ही कोई निर्माण कार्य नहीं करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता सतनाम सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किये।
याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) के मानकों के विपरीत गांव में स्टोन क्रेशर का निर्माण किया जा रहा है। मानकों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है।
नहर और नाले की भूमि पर भी निर्माण कार्य किया जा रहा है। इससे स्थानीय किसान और कृषि प्रभावित होगी। यही नहीं स्टोन क्रशेर से कुछ ही दूरी पर कथित रूप से प्राइमरी स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, मंदिर और एक आश्रम मौजूद है। उच्च न्यायालय ने पिछली बार सरकार को बिना जोन चिह्नित किए बिना प्रदेश में नये स्टोन क्रशेर को लाइसेंस नहीं देने के निर्देश दिए थे।
यह भी कहा गया कि जिस भूमि पर स्टोन क्रशेर का निर्माण किया जा रहा है, वह राज्य सरकार द्वारा घोषित 'फ्रूट बेल्ट' (फलों की पट्टी) है। नियमानुसार कृषि प्रधान क्षेत्र में भारी औद्योगिक इकाइयों की स्थापना प्रतिबंधित है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रशासन ने बुनियादी नियमों की अनदेखी कर निजी कंपनी को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया।
ग्रामीण वर्ष 2018 से ही इसका विरोध करते आ रहे हैं और कई बार नैनीताल के जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंप चुके हैं। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ए एस रावत और गौरव पालीवाल ने बताया कि अदालत ने आगे निर्माण कार्य पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सरकार से जवाब मांगा है।
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